गोविंद पानसरे हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह अदालत या जांच नहीं, बल्कि एक आरोपी की अचानक मौत है। इस घटनाक्रम ने जांच की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए है और वर्षों से लंबित इस केस की प्रगति पर भी नई बहस छिड़ गई है।
प्रसिद्ध भारतीय तर्कवादी, साम्यवादी नेता और लेखक गोविंद पानसरे हत्याकांड में नया मोड़ आया है। उनकी हत्या के मामले में सह-साजिशकर्ता आरोपी समीर गायकवाड़ की मंगलवार सुबह मौत हो गई। यह घटना महाराष्ट्र के सांगली जिले की है। 43 साल के गायकवाड़ कथित तौर पर सनातन संस्था के सदस्य बताए जाते थे।
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पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गायकवाड़ को अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि पहली नजर में यह दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ने का मामला लगता है। हालांकि, मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। पुलिस को इस मामले में कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा है।
2015 में किया गया था गिरफ्तार
समीर गायकवाड़ को पानसरे हत्याकांड में साजिश रचने के आरोप में 2015 में गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में उन पर अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाने का आरोप लगाया था। साल 2017 में उन्हें जमानत मिल गई थी और तब से वह सांगली में अपने घर पर ही रह रहे थे।
क्या था मामला?
गोविंद पानसरे और उनकी पत्नी पर 16 फरवरी 2015 को कोल्हापुर में हमला हुआ था। जब वे सुबह की सैर से लौट रहे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। इलाज के दौरान 20 फरवरी को पानसरे की मौत हो गई थी।
शुरुआत में कोल्हापुर पुलिस ने जांच की, फिर मामला एसआईटी को सौंपा गया। जांच में देरी होने पर पानसरे के परिवार ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद अगस्त 2022 में हाई कोर्ट ने यह केस एटीएस (एटीएस) को सौंप दिया। इस मामले में अब तक 12 आरोपियों की पहचान हुई है, जिनमें से नौ लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।