सरकार के मुताबिक, 2.93 लाख से ज्यादा विचाराधीन कैदी दिसंबर 2016 तक देश की विभिन्न जेलों में बंद थे। इनमें से चार हजार के करीब पिछले पांच साल से जेल में बंद हैं। दस साल से भी ज्यादा समय से बंद विचारधीनों का आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पास भी उपलब्ध नहीं है। कुल कैदियों में 3258 विदेशी विचाराधीन और 43 हिरासत में रखे गए हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति के 93,933 और 51,761 अनुसूचित जनजाति के विचाराधीन जेलों में बंद हैं।
क्षमता से 114 फीसदी कैदी जेलों में
एनसीआरबी के मुताबिक, देश की जेलों में क्षमता के मुकाबले 114.4 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं। 1401 जेलों की क्षमता तीन लाख 66 हजार 782 कैदियों को एक साथ बंद करने की है पर इन जेलों में क्रमश: चार लाख 19 हजार 623 से ज्यादा कैदी बंद हैं। अव्यवस्थाओं के चलते 2015 में 1584 कैदियों की मौत हो गई। इनमें 1469 प्राकृतिक और 115 अप्राकृतिक मौतें थीं।