भारत सरकार देश के दस और वेटलैंड को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव करेगी। इसमें हरियाणा का सुलतानपुर और भिंडावास वेटलैंड भी शामिल हैं।
हरियाणा के दोनों वेटलैंड पक्षी अभयारण्य हैं। इससे पहले दोनों वेटलैंड पर कभी विचार नहीं किया गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र के लोनार, बिहार की कंवर झील, उत्तराखंड का आसन और शेष उत्तर प्रदेश के वेटलैंड हैं। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में चल रहे प्रवासी प्रजातियों पर संयुक्त राष्ट्र समझौते के पक्षकारों के 13वें सम्मेलन (सीएमएस-सीओपी 13) में केंद्र सरकार रामसर सचिवालय को दस और वेटलैंड के नामों को प्रस्तावित करेगी।
पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार दस और वेटलैंड को रामसर साइट के रूप में संरक्षित करने और अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों के रूप में दर्जा दिलाने के लिए रामसर सचिवालय को एक संयुक्त प्रस्ताव भेजेगी। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो भारत में 47 स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित होंगे। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में भारत के दस वेटलैंड रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थल घोषित किए गए थे। वेटलैंड रामसर साइटों के रूप में घोषित सख्त दिशा निर्देशों के तहत संरक्षित हैं।
2023 तक भारत करेगा अध्यक्षता
भारत अगले तीन साल तक सीएमएस-सीओपी 13 की मेजबानी करेगा। भारत ने सोमवार को आधिकारिक रूप से इस संस्था की अध्यक्षता का प्रभार संभाला था। फिलीपींस ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को सीओपी की कमान सौंपी। 2017 से अब तक सीओपी की अध्यक्षता फिलीपींस के पास थी। भारत अब 2023 तक इसकी अध्यक्षता करेगा। जावड़ेकर ने कहा है कि भारत पर्यावरण का संरक्षण सुनिश्चित करेगा और उसमें पूरा सहयोग करेगा।