देश में पक्षियों पर संकट गहराता जा रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में 79 फीसदी पक्षियों की तादाद घटी है, जिनमें से कइयों के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में हुए इजाफे ने खुशखबरी भी दी है। प्रवासी जीवों पर हो रहे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, कॉप-13 में ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स रिपोर्ट : 2020’ के जरिए पक्षियों के ताजा आंकड़े सामने आए हैं।
इस रिपोर्ट में 867 प्रकार के पक्षियों का अध्ययन कर उनके दीर्घावधि (25 साल) और लघु अवधि (पांच साल) आंकड़े जुटाए गए। जिन 261 प्रजातियों के दीर्घावधि आंकड़े सामने आए हैं, उनमें से 52 फीसदी की तादाद साल 2000 से घट रही है। वहीं, 22 फीसदी की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। जिन 146 प्रजातियों के लघु अवधि के आंकड़ों का विश्लेषण हुआ, उनमें से 80 फीसदी की तादाद कम हुई है और 50 फीसदी की संख्या तो तेजी से गिरी है। इस रिपोर्ट में 101 प्रजातियों के संरक्षण पर अत्यधिक चिंता जताई गई है।
आमधारणा के विपरीत गौरैया का कुनबा स्थिर
मोरों में इजाफे के अलावा रिपोर्ट में आमधारणा के उलट एक राहत की बात गौरैया के कुनबे का स्थिर रहना भी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में गौरैयाकी संख्या में कोई ज्यादा कमी नहीं आई है। गांवों में इसका कुनबा बढ़ा है। हालांकि, दिल्ली, मुंबई समेत छह मेट्रो शहरों में थोड़ी गिरावट आई है। जैव विविधता के लिए मशहूर पश्चिमी घाटों पर साल 2000 से पक्षियों की तादाद में 75 फीसदी तक कम हुई है।
शिकारी पक्षी और प्रवासी समुद्री पक्षी ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि पक्षियों की 48 फीसदी प्रजातियों की संख्या स्थिर रही है अथवा दीर्घावधि में बढ़ी है। लेकिन पिछले पांच साल में 79 फीसदी पक्षियों की तादाद में गिरावट आना चिंताजनक है। तेजी से गिरावट वाले पक्षियों में शिकारी पक्षी, प्रवासी समुद्री पक्षी पिछले दशकों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।