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शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों के आगे नहीं झुकेगी सरकार, विपक्ष फैला रहा है भ्रम

Tue, 21 Jan 2020 03:20 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भाजपा नेताओं का मानना  है कि इससे विरोधियों को होगा नुकसान
  • लोगों को भड़काकर प्रदर्शन कराने से विपक्ष को कुछ नहीं मिलने वाला
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shaheen bagh caa protest - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीएए, एनपीआर और एनआरसी के विरोध के नाम पर 15 दिसंबर को शाहीन बाग से शुरू हुआ महिलाओं का प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में फैल रहा है। दिल्ली में ही करीब आधा दर्जन स्थानों पर इस तरह का प्रदर्शन चल रहा है, लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि इसके आगे झुकने की कोई जरूरत नहीं है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिल रही जानकारी के मुताबिक अभी तक शाहीन बाग के प्रदर्शनाकारियों से बातचीत या इस विरोध प्रदर्शन को समाप्त कराने का कोई रोड-मैप नहीं बना है। इस मामले को दिल्ली पुलिस ही अपने स्तर से देख रही है।
 

भाजपा नेताओं का कहना है कि शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन के पीछे आखिर कौन लोग हैं? कौन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून- 2019 को लेकर भड़का रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली का कहना है कि जो हो रहा है वह ठीक नहीं है। यह तो नागरिकता देने वाला कानून है। लेकिन इसे लेकर विपक्ष भ्रम फैला रहा है।

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भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दोनों ने साफ कहा है। इसके बाद भी लोग सीएए को समझने के लिए तैयार नहीं हैं।

कहां-कहां हैं शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन

अकेले राजधानी दिल्ली में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन चल रहा है। शाहीन बाग, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के गेट नंबर सात, खजूरी, तुर्कमान गेट, जाफराबाद, मुस्तफाबाद, कर्दमपुरी अन्य स्थानों पर महिलाएं धरने पर बैठकर नागरिकता कानून का विरोध कर रही हैं।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समाज की महिलाएं धरना-प्रदर्शन कर रही हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने नागरिकता कानून के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शन को नाकाम कर दिया है।

सरकार अल्पसंख्यकों की आवाज नहीं सुनना चाहती

शाहीनबाग में प्रदर्शन कर रहे फराज का कहना है कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक मुसलमानों की आवाज नहीं सुनना चाहती। उसका हमारे दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं है। संसद भवन में मिले असलम भी केंद्र सरकार और भाजपा के रुख से काफी तंग हैं। असलम का कहना है कि केंद्र सरकार की मंशा ठीक नहीं है।

वह देश का अमन चैन खराब करने और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय सचिवालय में वरिष्ठ पद पर काम कर रहे अल्पसंख्यक सूत्र का कहना है कि सरकार जानबूझकर लोगों में भ्रम और डर फैलाने के प्रयासों का हिस्सा बन रही है।

वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उनके कई साथी दूसरे मंत्रालयों में काम कर रहे हैं, लेकिन सभी को लग रहा है कि देश के मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है।

प्रदर्शनों से कोई फर्क नहीं पड़ता

भाजपा के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि लोगों के उकसावे में आकर शाहीन बाग जैसा प्रदर्शन मुसलमान महिलाएं जितना चाहें, कर लें। इससे कुछ नहीं होने वाला है। केंद्र सरकार की मंशा साफ है। वहीं कांग्रेस पार्टी के रोहन गुप्ता का कहना है कि केंद्र सरकार की नीति लोगों को बांटो और राज करो की है।

भाजपा और संघ इसके जरिए एक नए तरह का राष्ट्रवाद फैलाने में लगा है। राजनीति के विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से भाजपा का ही फायदा हो रहा है। वह लोगों के बीद में अपना संदेश फैलाने, हिंदू-मुसलमान के बीच में दूरी बढ़ाने और वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में सफल है।

दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर सूत्र का कहना है कि इसका लाभ भाजपा और आम आदमी पार्टी को मिल रहा है। कांग्रेस हाशिए पर चली गई है। भाजपा की निगाह जहां हिंदू वोटों की एकजुटता पर टिकती जा रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी सीन से गायब हो गई है।

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अब भाजपा की सीधी लड़ाई आमआदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से है। भाजपा पश्चिम बंगाल की प्रयोगशाला में भी लगातार प्रयोग कर रही है।

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