विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत में लड़कियों से शादी कर विदेश भाग जाने वाले भगोड़े दुल्हों की भारत में मौजूद संपत्ति को जब्त करने के लिए कानून बनाया जा रहा है। इसे समन एवं वारंट अगेंस्ट इंडियन पीपुल्स लीविंग एबरोड, का नाम दिया गया है। मंत्रालय का प्रयास है कि यह बिल संसद के चालू सत्र में ही पेश कर दिया जाए। अगर इस बार यह पेश नहीं हो सका तो अगले सत्र में इसे कानून का रूप दे दिया जाएगा।
स्वराज शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार के राज्य महिला आयोग द्वारा एनआरआई विवाह एवं महिला अवैध तस्करी, विषय पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रही थीं। उन्होंने कहा, इस कानून में यह प्रावधान भी रहेगा कि विदेश में रहने वाले किसी भारतीय को अगर समन या वारंट भेजना हो तो उसे मंत्रालय की समर्पित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। यहां पर प्रकाशित होने के बाद यह माना जाएगा कि वारंट-नोटिस संबंधित व्यक्ति ने इसे पढ़ लिया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह देखा गया है कि यहां से शादी कर भागने वाले दुल्हे विदेश में जाकर अपना पता, ईमेल व फोन नंबर बदल लेते हैं। उसी को ध्यान में रखकर यह वेबसाइट तैयार की जा रही है। भगोड़े दुल्हे की भारत में संपत्ति जब्त करने का जो मसौदा तैयार किया गया है, उस पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी सहमत हैं। अकेले पंजाब में ही करीब 15 हजार महिलायें ऐसी हैं, जो एनआरआई विवाह के मामलों में फंसी हैं।
विदेश भेजने के 'बहाने' जानकर हंसी आ जाएगी
'राजनीतिक पार्टी तंग करती है, इसलिए मांग रहे शरण'
विदेश भेजने के लिए मानव तस्करी का एक नया रूप सामने आया है। विदेश मंत्री ने कहा, एजेंट लोगों को शरणार्थी बनाकर विदेश भेज रहे हैं। इसमें पंजाब पहले नंबर पर, हरियाणा दूसरे और गुजरात तीसरे स्थान पर है। एक व्यक्ति से लगभग 25 लाख रुपए लिए जाते हैं। एजेंट इनके दस्तावेज में क्या लिखते हैं, यह बड़ा रोचक है।
पंजाब से आवेदन करने वालों के दस्तावेजों में लिखा होता है कि हम आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं, वहां पर कांग्रेस पार्टी की सरकार है, वह हमें प्रताड़ित कर रही है। इसलिए हमें अपने देश में शरण दे दीजिए।
हरियाणा के आवेदक लिखते हैं कि हम इनेलो के कार्यकर्ता हैं, वहां पर भाजपा की सरकार है, वह हमें परेशान कर रही है। यही वजह है कि हम आपके देश में शरण चाहते हैं।पिछले तीन साल में करीब 600 लोगों ने इस तरकीब का सहारा लेकर अमेरिका में जाने की चेष्टा की है। राज्य सरकारों को अवैध एजेंटों पर शिकंजा कसना होगा।