मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संसद के शीत सत्र में लोकसभा में एक विधेयक पेश करेगी। इस विधेयक के कानून बनते ही आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों और हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार मिल जाएगा।
नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 15 दिसंबर से शुरू होने जा रहे संसद के अगले सत्र में इस विधेयक को पेश कर दिया जाएगा। मोदी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस विधेयक को ओबीसी वोटरों को अपने पक्ष में करने के मोदी सरकार के एक बड़े प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अन्य पिछड़ा वर्ग की सभी श्रेणियों की ओर से इस आयोग के गठन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके मद्देनजर इस आयोग को अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के बराबर दर्जा देने के लिए सरकार ने पिछले सत्र में एक विधेयक भी पेश किया था। लोकसभा ने इसे पारित कर दिया था।
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इसके बाद राज्यसभा में इस पर चर्चा हुई लेकिन वहां उसे कुछ संशोधनों के साथ पारित किया गया। इससे एक ही विधेयक के दो संस्करण हो गए। इसके मद्देनजर इस विधेयक को दोबारा लोकसभा में पेश करने की जरूरत आन पड़ी है।