तिरंगे और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सरकार अधिक संजीदा है। शिक्षण संस्थानों में निर्धारित ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के केंद्र सरकार के आदेश पर अमल के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसी क्रम में प्रमुख राष्ट्रीय पर्वों और समारोहों में प्लास्टिक से तैयार तिरंगे पर सरकार ने सख्त कदम उठाया है।
इस बाबत शिक्षण संस्थानों को जरूरी निर्देश भी दिए गए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और कालेजों में प्लास्टिक से तैयार तिरंगे का प्रयोग न करने की अपील की है। कुलपतियों को भेजे पत्र में यूजीसी ने निर्देश दिया है कि कार्यक्रमों में कागज से तैयार तिरंगे का प्रयोग किया जाए।
आयोग ने लिखा है कि प्लास्टिक के झंडे का निस्तारण आसान नहीं है। ऐसे में आयोजनों के बाद कैंपस में तिरंगे या इसके किसी हिस्से का अपमान होता है तो संबंधित लोगों को सजा या जुर्माने के लिए भी तैयार रहना होगा।
यूजीसी के सचिव प्रो. जसपाल एस संधू ने सोमवार को सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को एक पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ समय में प्लास्टिक से तैयार तिरंगे का इस्तेमाल बढ़ा है। चूंकि इसका निस्तारण आसान नहीं होता है। इसलिए परिसर में तिरंगे के इधर-उधर पड़े रहने की शिकायत भी है।
यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। इसे देखते हुए उन्होंने निर्देश दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों में प्लास्टिक की बजाय कागज से तैयार तिरंगे का प्रयोग किया जाए। कुलपतियों को निर्देश दिया है कि वे तिरंगे के लिए उचित दिशा-निर्देश कॉलेजों, शिक्षकों और छात्रों को जारी करें।
यूजीसी ने कहा है कि विवि और कॉलेजों के राष्ट्रीय, सांस्कृतिक महोत्सव समेत खेलकूद प्रतिस्पर्धा आदि कार्यक्रम खत्म होने के बाद तिरंगा यहां-वहां न फेंकें। यूजीसी ने लिखा है कि कागज से तैयार तिरंगे के निपटान के लिए भी विवि उचित व्यवस्था करें। यदि कैंपस में तिरंगे का अपमान हुआ तो संबंधित लोगों को कानून के तहत जेल या फिर जुर्माना राशि जमा करने के लिए तैयार रहना होगा।