अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय(एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर मौजूदा एनडीए सरकार के पक्ष को विश्वविद्यालय ने राजनीति का हिस्सा करार दिया है। एएमयू का कहना है कि महज इसलिए कि केंद्र सरकार में अलग राजनीतिक विचारधारा वाली सरकार आ गई है तो सरकार अपना रुख नहीं बदल सकती।
मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक सस्थान नहीं है। इस फैसले को यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन मोदी सरकार केकेंद्र में काबिज होने केबाद केंद्र ने अपना पक्ष बदल दिया। मोदी सरकार ने हाईकोर्ट केफैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील को वापस लेना चाहती है और इस संबंध में उसने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर इसकी इजाजत मांगी है।
केंद्र सरकार के नए रुख के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में एएमयू ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार ने अपना रुख इसलिए बदला है क्योंकि उसकी राजनीतिक विचारधारा अलग है। कोई भी राजनीतिक दल अपने राजनीतिक आदर्शों की वजह से पिछली सरकार से अलग रुख नहीं ले सकती। खासतौर पर तब जब पक्ष में बदलाव रूल ऑफ लॉ के उलट हो।
एएमयू ने एनडीए सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह विश्वविद्यालय केअल्पसंख्यक दर्जें के खिलाफ इसलिए नहीं जा सकती क्योंकि ऐसा करना असंवैधानिक, गैरजिम्मेदारना है। ऐसा करना केंद्र सरकार की संवैधानिक दायित्वों से जानबूझ मुंह मोडना है।
हलफनामे में एएमयू का कहना है कि विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा सभी मुस्लिमों के लिए बहुत मायने रखता है। केंद्र सरकार को 1981 में संसद द्वारा पारित कानून को चुनौती देने की इजाजत नहीं दी जा सकती। मालूम हो कि 1981 में संसद में अदालती आदेश को बदलते हुए एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा वापस दिया था।