चीन में बने दूरसंचार उपकरण खरीदने वाली कंपनियों को अनिवार्य जांच से गुजरना होगा। इसके बाद उन्हें दूरसंचार उपकरण प्रमाणन पत्र जारी होगा। यदि किसी कंपनी से पहले से कोई ऑर्डर दे रखा है तो स्वदेश में आते ही उन उपकरणों की जांच होगी।
सौदा तय करते समय तय हुए उनके तकनीकी मापदंडों को जांचा जाएगा। उसके बाद उपकरणों की सुरक्षा जांच की जाएगी। अगर गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलती है, तो ही उनके इस्तेमाल की इजाजत मिलेगी। बीआईएस जैसे संस्थान इन उपकरणों की जांच टीम में शामिल रहेंगे।
भविष्य में यदि किसी कंपनी को चीन से इन उपकरणों का आयात करना है तो उसे पहले से ही केंद्र सरकार के पास फाइल जमा करानी होगी। अगर यहां से मंजूरी मिलती है तो ही उपकरणों की खरीद सुनिश्चित होगी।
यह अलग बात है कि भारतीय दूरसंचार कंपनियां अभी केंद्र सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। वजह, उनके सामान की त्वरित डिलीवरी एवं कम दाम वाले उपकरण किसी दूसरे देश से एकाएक मिलना संभव नहीं है।
अगर यह प्रयास होता है कि उसमें समय पर डिलीवरी और महंगे रेट, ये दोनों समस्या आगे आएंगी। केंद्र सरकार के ये आदेश 5जी तकनीक को लेकर निजी क्षेत्र के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।