सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को हाईकोर्ट के जज के तौर पर दो वकीलों की प्रोन्नति की सिफारिश पर पुनर्विचार करने को कहा है। हालांकि इस फैसले के पीछे कोई वजह नहीं बताई गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कॉलेजियम ने 2016 में हरनरेश सिंह गिल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और मोहम्मद निजामुद्दीन को कलकत्ता हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति देने की सिफारिश भेजी थी।
हाल ही में सरकार दो और वकीलों की नियुक्ति की सिफारिश वापस भेज चुकी है। इनमें शीर्ष अदालत के एक पूर्व जज के बेटे को इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई थी जिसे सरकार ने दूसरी बार यह कहकर कॉलेजियम को वापस कर दिया कि उनके खिलाफ कई शिकायतें हैं। ये दोनों वकील मोहम्मद मंसूर और बशारत अली खान थे।
मंसूर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सगीर अहमद के बेटे हैं। इसी तरह सरकार जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के जज के तौर पर वकील नजीर अहमद बेग की नियुक्ति की सिफारिश भी वापस कर चुकी है। बेग के लिए कॉलेजियम की सिफारिश वापस करने का भी सरकार ने कोई कारण नहीं बताया।