असम के बोडो इलाके में स्थायी शांति के लिए केंद्र ने असम सरकार व तीन मुख्य विद्रोही गुटों के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है। गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार को गृह मंत्रालय में हुए समझौते के तहत अब कोई गुट अलग बोडो राज्य की मांग नहीं करेगा।
साथ ही असम के खतरनाक उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के चार गुटों के 1550 विद्रोही 150 हथियारों के साथ 30 जनवरी को आत्मसमर्पण करेंगे। सरकार हथियार डालने वाले विद्रोहियों के पुनर्वास और क्षेत्र के विकास के लिए 1500 करोड़ का आर्थिक पैकेज देगी।
शाह ने इसे ऐतिहासिक करार बताते हुए कहा, केंद्र असम समेत पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समझौता उसी का अहम हिस्सा है। बोडो उग्रवाद के कारण कुछ दशकों में 4000 से ज्यादा लोगों की जान गई है। यह समझौता बोडो लोगों के विकास का रास्ता खोलेगा।
शाह की मौजूदगी में एनडीएफबी, ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन (एबीएसयू) और यूनाईटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गनाईजेशन (यूबीपीओ) के शीर्ष नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्र की ओर से गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने हस्ताक्षर किए। असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल ने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए। एबीएसयू 1972 से अलग बोडोलैंड के लिए आंदोलन चला रही थी।
27 साल में तीसरा समझौता
इस मसले पर 27 साल में तीसरा करार है। पहला समझौता 1993 में ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन से हुआ था, जिसमें सीमित राजनीतिक शक्तियों के साथ बोडोलैंड ऑटोनोमस काउंसिल के गठन की बात थी। 2003 में दूसरा समझौता विद्रोही संगठन बोडो लिबरेशन टाइगर से हुआ।
उसमें असम के चार जिलों कोकराझार, चिरांग, बसका और उदालगुड़ी को मिलाकर बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट (बीटीएडी) बनाने की सहमति हुई। नए समझौते के तहत बीटीएडी का नाम बदलकर बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) कर दिया गया।
इसके पास ज्यादा, विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और आर्थिक शक्तियां होंगी। संविधान की छठी अनुसूचि के तहत आयोग गठित होगा, जो बोडो बहुल क्षेत्रों को बीटीआर में शामिल कर क्षेत्र का परिसीमन करेगा। साथ ही बोडो के सामाजिक, सांस्कृतिक, बोली और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मसलों का भी समाधान करेगा।