केंद्र सरकार ने गेहूं की फसल पर बढ़ती गर्मी के असर का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन किया है। यह कदम राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएफसी) के पूर्वानुमान के मध्य आया है। इसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश को छोड़कर सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में फरवरी के पहले सप्ताह के दौरान अधिकतम तापमान पिछले सात वर्षों के मुकाबले औसत से अधिक था।
यह समिति फसलों के नुकसान की निगरानी के साथ किसानों को समाधान भी सुझाएगी। साथ ही आवश्यकता के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई को अपनाने के लिए परामर्श भी जारी करेगी। कृषि सचिव मनोज आहूजा ने कहा कि इस साल अगेती बुआई और गर्मी सहन कर सकने वाले उच्च गुणवत्ता वाले बीज के कारण फसल को नुकसान की संभावना काफी कम हो गई है।
- यूपी सरीखे कई राज्यों में कटाई हो रही है। इस साल गेहूं का रिकार्ड 11.21 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है।
- पिछले साल कुछ राज्यों में लू की वजह से गेहूं के उत्पादन (10.77 करोड़ टन ही) में कुछ कमी आई थी।
कोंकण, कच्छ के लिए लू की चेतावनी वापस
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कोंकण और गुजरात के कच्छ क्षेत्र के लिए जारी लू की चेतावनी सोमवार को वापस ले ली। आईएमडी ने रविवार को कहा था कि कच्छ और कोंकण के कुछ इलाकों में अगले दो दिनों तक लू चलने की संभावना है। आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक नरेश कुमार ने कहा, मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के अभाव में कच्छ और कोंकण क्षेत्र में आसमान साफ है।
कोंकण और कच्छ क्षेत्र में अगले दो-तीन दिन के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट हो सकती है। गुजरात के अधिकतर हिस्सों में अगले 24 घंटे के दौरान अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।