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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: मराठा आरक्षण असांविधानिक नहीं, आज भी सुनवाई

Wed, 24 Mar 2021 02:57 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • कहा, महाराष्ट्र सरकार के पास मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण देने का विधायी अधिकार, आज भी होगी सुनवाई
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा, महाराष्ट्र सरकार के पास मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण देने का विधायी अधिकार प्राप्त है और उसके द्वारा लिया गया यह निर्णय सांविधानिक है।

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केंद्र ने कहा, संविधान के 102वें संशोधन से राज्य सरकार को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) की सूची बनाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता है। मामले में बुधवार को भी सुनवाई होगी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष कहा, महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए गए सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2018 के तहत मराठा समुदाय के लोगों को नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देना सांविधानिक है।
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मेहता ने कहा, 102वें संविधान संशोधन अधिनियम में जोडे़ गए अनुच्छेद- 342 ए में केंद्र सरकार को एसईबीसी का पता लगाने का अधिकार है। उन्होंने कहा, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मसले पर जो राय रखी है, उसे केंद्र सरकार का पक्ष समझा जाए।

18 मार्च को अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि 102वां संशोधन राज्यों को एसईबीसी के तहत कानून बनाने से नहीं रोकता है। वेणुगोपाल ने इसे सांविधानिक बताया था। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि अनुच्छेद-342 ए सविधान संशोधन के तहत बनाया गया है। इसके तहत जो प्रावधान किया गया है वह राज्य को एसईबीसी घोषित करने के अधिकार से वंचित नहीं करता है।

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