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आम नागरिक के हवाई सफर पर संकट, 'उड़े देश का आम नागरिक' योजना की फंडिंग में आई कमी 

Sun, 17 Dec 2017 06:52 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
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उड़ान स्कीम
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उड़ान योजना के तहत अधिक मार्ग पर परिचालन शुरू हो चुका है, लेकिन विमान मंत्रालय को आशंका है कि विमानन कंपनियों को आर्थिक दृष्टि से व्यवहारिक बनाने के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने यह दावा किया है। 
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देश के कम सक्रिय हवाई अड्डों को जोड़ने और विमान सेवा को किफायती बनाने के लिए मंत्रालय ने उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) शुरू की। शुरुआत में 128 मार्ग के लिए 70 एयरपोर्ट को जोड़ने की योजना थी। बाद में दूसरी दौर की नीलामी में विमान कंपनियों से कुल 141 प्रस्ताव मिले हैं, जिन पर इस महीने के अंत तक फैसला आना है। 

मंत्रालय का मानना है कि उड़ान के तहत कंपनियों को आर्थिक दृष्टि से व्यवहारिक बनाने के लिए फंड (वीजीएफ) देने के लिए जो राशि उपलब्ध है, वह पर्याप्त नहीं है। वीजीएफ फंड का 80 फीसदी धन मंत्रालय देता है, जबकि 20 फीसदी राज्य सरकार। 
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पूर्वोत्तर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में यह अनुपात 90 और 10 का हो जाता है। वीजीएफ के तहत मंत्रालय हर उड़ान पर पांच हजार का शुल्क वसूल रहा है और एक साल में 200 करोड़ मिलने का अनुमान है। लेकिन अब तक शुल्क के जरिए सिर्फ 70 करोड़ रुपये जुट पाए हैं। 

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जैसे ही उड़ान के अंतर्गत ज्यादा मार्गों पर यातायात शुरू हो जाएगा वीजीएफ कम पड़ जाएगा। आने वाले साल में पहले चरण में सभी हवाई अड्डों से यातायात शुरू हो जाएगा। 

मंत्रालय फंड की कमी से बचने के लिए राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ा सकती है। बजटीय सहायता से भी रास्ता निकाला जा सकता है। हालांकि अभी इन पर फैसला नहीं लिया गया है। 
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