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दावे को सरकार ने किया खारिज, कहा- उनका डाटा किसी वैज्ञानिक अध्य्यन पर आधारित नहीं

Thu, 26 May 2016 08:14 AM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला,नई दिल्ली
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कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि भारत केप्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर का यह कहना कि देश में 40 हजार न्यायाधीशों की दरकार है, यह किसी वैज्ञानिक शोध या अध्य्यन पर आधारित नहीं है। कानून मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में निचली अदालतों में मामलों की संख्या में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं इस दौरान जजों की संख्या में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। मालूम हो कि पिछले दिनों प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा था कि वर्ष 1987 में अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। जजों की कमी से आहत प्रधान न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि फिलहाल देश में और करीब 40 हजार न्यायाधीशों की दरकार है। 
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कानून मंत्री ने कहा कि जब तक हमारे पास कोई वैज्ञानिक अध्य्यन नहीं आ जाता तब तक कुछ नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि 1887 की विधि आयोग की रिपोर्ट विशेषज्ञों और आम लोगों की विचार पर आधारित था। किसी वैज्ञानिक अध्य्यन या शोध पर आधारित नहीं थी। उन्होंने बताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विधि आयोग को विचार करने के लिए कहा है। चूंकि मामला अभी अदालत में है लिहाजा हम इस पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।

विधि एवं कानून मंत्रालय ने बुधवार को दो साल में अपनी उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि जजों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार कटिबद्ध है। कानून मंत्री ने बताया कि एक मई 2014 में हाईकोर्ट में जजों की क्षमता 906 थी, जिसे 27 अप्रैल 2016 में बढ़ाकर 1065 कर दिया गया। वहीं वर्ष 2012 के अंत में निचली अदालतों में जजों की क्षमता 17715 थी, दिसंबर 2015 में इसे बढ़ाकर 20502 कर दिया गया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(एनजेएसी) के कानूनी पचड़े में कारण सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में नियुक्ति प्रकिया पर कुछ विराम लग गया था।
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उन्होंने बताया कि 86 एडिशनल जज को स्थायी बनाया गया। 51 नए जजों की नियुक्ति की गई और 170 की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया चल रही है। कानून मंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सरकार ने मेमोरंडम ऑफ प्रपोजल (एमओपी) भारत केप्रधान न्यायाधीश को भेज दिया है, अब उनकी ओर से जवाब आना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि हमने प्रधान न्यायाधीश से पत्र लिखकर यह भी कहा कि जब तक नया एमओपी अस्तित्व में नहीं आ जाता तब तक पुराने एमओपी के तहत ही नियुक्ति की जाए।

1175 कानून खत्म किए
कानून मंत्री ने बताया कि 1827 ऐसे पुराने कानून की पहचान की गई है, जिसे खत्म करने की योजना है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने 1175 कानूनों को खत्म कर दिया है। 427 और कानूनों को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है। 227 ऐसे कानून हैं, जिन्हें राज्यों को खत्म करना होगा। उन्होंने बताया कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिदिन एक पुराने कानून को खत्म करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन हमने लक्ष्य से अधिक काम किया।  उन्होंने कहा कि 14 वर्षों केबाद यह काम किया गया। 

दल  विरोधी अधिनियम में संशोधन पर हो रहा है विचार
कानून मंत्री ने बताया कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल विरोधी अधिनियम) में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की पीठ का गठन का नहीं आया प्रस्ताव
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की पीठ के गठन को लेकर अमर उजाला के सवाल पर कानून मंत्री ने बताया कि किसी भी राज्य में हाईकोर्ट की अलग पीठ का गठन केलिए प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट के चीफ की ओर से आता है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय को यूपी के मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट केचीफ जस्टिस की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि राज्य के कुछ सांसदों की ओर से उनकेपास यह प्रस्ताव जरूर आया है। कानून मंत्री ने बताया कि वास्तव में पीठ के गठन को लेकर सभी तरह की आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने का दायित्व राज्य सरकार का आता है। कानून मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य केमुख्यमंत्री के द्वारा अगर इस तरह का प्रस्ताव आता है तो उस पर विचार किया जाएगा।

अत्याधिक कानूनी पचड़े से बचेगी सरकार
कानून मंत्री ने कहा कि सरकार अत्यधिक कानूनी पचड़े से बचने का प्रयास करेगी। उन्होंने कि सरकार ही इन दिनों सबसे अधिक मुकदमे लड़ रही है। सरकार का प्रयास होगा कि वह वेवजह की याचिका दाखिल न करें। सरकार प्रभावी और जिम्मेदार याची बनने का प्रयास करेगी। साथ ही सरकार की कोशिश होगी कि विभिन्न राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र केउपक्रम(पीएसयू) के साथ कानूनी लड़ाई को काफी हद तक नजरअंदाज किया जाए। इससे नि:संदेह की मुकदमों में कमी आएगी। कानून मंत्री ने बड़ी संख्या में लंबित मामलों की एक वजह सुनवाई का बार-बार टाला जाना भी बताया। 

ट्रिब्यूनल को कम करने का प्रयास जारी
कानून मंत्रालय ने बताया कि ट्रिब्यूनल की संख्या को काम करने का प्रयास चल रहा है। इसे लेकर उच्च स्तरीय मंत्रीमंडलीय समूह का गठन किया गया है, जो इस मसले पर विचार करेगा।

कानूनी साक्षरता को राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को जोड़ा
कानून मंत्रालय ने कहा कि कानूनी साक्षरता को राष्ट्रीय साक्षरता मिशन अथॉरिटी (एनएलएमए) केसाथ जोड़ दिया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के62 और राजस्थान के31 जिलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। 
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