एक्ट के प्रावधानों में बदलाव पर केंद्र पर निशाना साधने वाली बसपा प्रमुख
मायावती को पासवान ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने मायावती ने कार्यकारी आदेश के जरिए बलात्कार जैसे मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले पीड़िता का मेडिकल टेस्ट अनिवार्य कर दिया था। इतना ही नहीं इस आदेश में उन्होंने इस एक्ट के व्यापक दुरुपयोग की बात करते हुए प्रशासन से कहा था कि एफआईआर तभी दर्ज हो जब वह जांच में सही पाया जाए।
इस दौरान पासवान ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में वंचितों की भावनाओं को समझते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट विशेष एक्ट है। शोषितों-वंचितों को प्रताडना, शोषण, उत्पीडन से बचाने के लिए संविधान निर्माताओं ने संविधान में विशेष प्रावधान किए थे। मगर इस फैसले से इस एक्ट की मूल भावना पर आंच पहुंची है।