छत्तीसगढ़ के सुकमा में सुरक्षा बल पर हुए बड़े हमले केबाद नक्सलियों पर सर्जिकल स्ट्राइक का ब्लू प्रिंट तैयार हो रहा है। नक्सल मामले में केंद्र सरकार के सलाहकार विजय कुमार ने नक्सलियों के साथ आक्रामक रुख अपनाने की दी सलाह। इस तैयारी में विजय कुमार और सीआरपीएफ महानिदेशक (डीजी) संदीप लखटकिया समेत करीब आठ वरिष्ठ अधिकारियों ने सुकमा के दूरदराज इलाकों का दौरा किया है।
यह अधिकारी सर्जिकल स्ट्राईक के मद्देनजर गृहमंत्री राजनाथ को जल्द अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। हालांकि राजनाथ ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सुकमा नक्सली हमले में अपनी गल्ती की समीक्षा करने को कहा है।
गृहमंत्रालय की योजना है कि पिछले साल अक्टूबर में उड़ीसा केमलकानगिरी में नक्सल विरोधी विशेष बल ग्रेहाउंड्स और राज्य पुलिस की साझा कार्रवाई की तर्ज पर सर्जिकल स्ट्राईक की जाए।
सटीक खुफिया इनपुट के आधार पर की गई उस कार्रवाई में 23 नक्सली एक साथ सुरक्षा बल के हत्थे चढ़े थे। इनमें आठ महिला नक्सली समेत कुख्यात उदय, सुधीर, अनिल और बाकुरी वेंकटरमन भी मारा गया था।
राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि सुकमा हमले से साफ है कि नक्सली हताश हो चुकेहैं। राजनाथ ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि सीआरपीएफ के जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी।
गृहमंत्री के मुताबिक 2016 में नक्सलियों के हमले में 15 फीसदी की गिरावट आई है। यह समारिक जगहों पर सुरक्षा बलों की योजनाबद्ध तैनाती और लगातार चल रही कार्रवाई की नतीजा है। राजनाथ ने जानकारी दी कि पछले साल 135 नक्सली मारे गए जबकि 700 को गिरफ्तार किया गया है।
गृहमंत्री ने बताया कि पिछले एक साल में 1198 महिला और पुरुष नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह केंद्र के सरेंडर पॉलिसी का नतीजा है। इसकेतहत भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में आने का मौका होता है जिसमें उन्हें पांच लाख रुपए तक की आर्थिक मदद दी जाती है। गृहमंत्रालय सूत्रों के मुताबिक अब नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व काफी कमजोर हो चुका है।
नक्सली ऐसे हमले कर यह संदेश दे रहे हैं कि अभी उनमें ताकत बची हुई है। ऐसे में अगर ठोस योजना के तहत सर्जिकल स्ट्राईक जैसी कार्रवाई की जाए तो सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हासिल होगी।