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नीली क्रांति के माध्यम से भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की सरकार की योजना

Thu, 27 Dec 2018 09:40 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार न केवल कृषि विकास के साथ किसानों के आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है बल्कि किसानों के विकास के लिए जमीनी स्तर पर भी ठोस कदम उठा रही है। इसके लिए पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य विभाग, पशुधन की उत्पादकता को दोगुना करने के साथ श्वेत क्रांति के नये आयाम प्राप्त करना है तथा नीली क्रांति के माध्यम से मत्स्यविकास के क्षेत्र में भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है। इसके लिए हमें श्वेत क्रांति एवं देशी गोवंशीय एवं महीष वंशीय नस्लों का विकास करना होगा। 

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देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 1496 करोड़ रू. की 28 राज्यों में परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिसके द्वारा 41 देशी गाय की नस्ल तथा 13 महिषवंशी नस्लो का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। गोकुल ग्राम योजना के तहत 13 राज्यों में 20 गोकुल ग्राम हेतु 196 करोड़ रु. स्वीकृत किये गए हैं, जिसमें से 3 पर कार्य पूर्ण कर लिया गया है। देशी नस्ल के पशुओं के समग्र एवं वैज्ञानिक तरीके से विकास और स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए देश में प्रथम बार 50 करोड़ रुपये की लागत से 2 नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेन्टर, (चिंतल देवी, जिला नेल्लोर, आंध्र प्रदेश में तथा इटारसी, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश) की स्थापना की जा रही है। 

आंध्र प्रदेश का कामधेनु केंद्र लगभग पूर्ण हो गया है। इसके अतिरिक्त देश भर में 28 वीर्य केंद्रों को एन.डी.पी.-1 के तहत सुदृढ़ किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 12 भ्रूण लिंग प्रौद्योगिकी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं तथा नस्ल सुधार कार्यक्रम में गति लाने के लिए 13 लिंग सोर्टेड वीर्य उत्पादन की सुविधा के लिए उच्च ए-ग्रेडेड वीर्य केंद्रों पर भी कार्य किया जा रहा है। 825 करोड़ रूपये की राष्ट्रीय बोवाईन उत्पादकता मिशन के तहत 9 करोड़ दुधारू पशुओं को नकुल स्वास्थ्य पत्र उपलब्ध कराया जारहा है। अब तक 1.08 करोड़ पशुओं को चिन्हित किया जा चुका है।
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देशी बोवाईन नस्लों के प्रजनकों और किसानों को जोड़ने के लिए ई-पशुधन हाट पोर्टल की स्थापना नवंबर, 2016 में की गई है, पोर्टल पर 7.96 करोड़ वीर्य खुराकों, 364 भ्रूण एवं 80,383 जीवित पशुओं की सूचना उपलब्ध है, जिससे कि कोई भी इच्छुक किसान इन्हें खरीद सके। डेयरी विकास में भी प्रगति की गति काफी तेज है। जहां तक डेयरी विकास का प्रश्न है, भारत दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और विश्व के कुल दूध उत्पादन में 19 प्रतिशत योगदान करता है। वर्ष 2017-18 में दूध उत्पादन 176.35 मिलियन टन रहा जोकि वर्ष 2010-14 के औसत वार्षिक दूध उत्पादन 129.95 मिलियन टन से 35.70% अधिक है।

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