इसका निर्माण थार के रेगिस्तान के पूर्वी तरफ किया जाएगा। गुजरात के पोरबंदर से लेकर हरियाणा के पानीपत तक इसका निर्माण किया जाएगा। इस ग्रीन वॉल से घट रहे वन क्षेत्रों में इजाफा होगा। साथ ही गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली की पहाड़ियों पर घटती हरियाली के संकट को भी कम किया जा सकेगा।
इस ग्रीन वॉल के निर्माण से पश्चिमी भारत और पाकिस्तान की तरफ से दिल्ली आने वाली धूल भरी हवाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत में घटते वन और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने का यह विचार हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन (सीओपी14) से आया है। हालांकि अभी यह विचार मंजूरी के लिए आखिरी चरण में नहीं पहुंचा है।
बता दें कि अफ्रीका में 'ग्रेट ग्रीन वॉल' पर करीब एक दशक पहले काम शुरू हुआ था। हालांकि इसमें कई देशों की भागीदारी होने और उनकी अलग-अलग कार्यप्रणाली के चलते अब भी यह पूरी नहीं हो पाया है। भारत सरकार इस प्रोजेक्ट को 2030 तक राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखकर साकार करना चाहती है। इस प्रोजेक्ट के तहत दो करोड़ 60 लाख हेक्टेयर भूमि को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य है।
हालांकि इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी तक कोई भी अधिकारी खुलकर बात नहीं कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह प्लान मंजूरी की अवस्था पर नहीं है। ऐसे में इस पर अभी बात करना जल्दबाजी होगी।
अधिकारियों ने कहा कि यह ग्रीन वॉल लगातार नहीं होगी, लेकिन अरावली पहाड़ियों के एक बड़े हिस्से को इसके तहत कवर किया जाएगा, ताकि उजड़े हुए जंगलों को फिर से हरा-भरा किया जा सके। इसके लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण भी किया जाएगा।
इसरो ने 2016 में एक तस्वीर जारी की थी, जिसके मुताबिक गुजरात, राजस्थान और दिल्ली ऐसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हैं, जहां 50 फीसदी से ज्यादा भूमि हरित क्षेत्र से बाहर है। इस कारण इन क्षेत्रों में रेगिस्तान का दायरा बढ़ रहा है।