लेखी के केजरीवाल सरकार के हर मोर्चे पर फेल होने के आरोपों पर सुले ने पूछा कि अगर ऐसा है तो भाजपा बार-बार चुनाव क्यों हार रही है। अगर केजरीवाल सरकार वाकई कुछ नहीं कर रही तो विधानसभा चुनाव में भाजपा उससे पार क्यों नहीं पा रही? केजरीवाल सरकार में कुछ तो है कि वह विधानसभा की 70 में से कभी 67 तो कभी 62 सीटें जीतती हैं।
विज्ञापन के सवाल पर सुले ने कहा, यह हर राज्य और केंद्र की समस्या है। सभी सरकारें विज्ञापन पर भारी खर्च करती हैं। अगर लेखी और यह सदन सहमत हो तो जरूरी विज्ञापनों के इतर अन्य विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए। सुले ने कहा, केंद्र का दायित्य राज्यों के हितों की रक्षा करना है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की रक्षा करने की है। हालांकि इस बिल के जरिए सरकार राज्य और लोकतंत्र दोनों का नुकसान कर रही है।
पूर्ण राज्य की बात करने वाले विधानसभा को बना रहे पंगु : मनीष
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, कभी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अभियान चलाने वाली भाजपा अब इसके उलट दिल्ली सरकार के सारे अधिकार छीनने पर आमदा है। वर्ष 2003 में तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने लुटियन जोन को छोड़ कर शेष दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने वाला बिल भी पेश किया था। अब भाजपा की वही सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा देना तो दूर राज्य सरकार के सारे अधिकार छीन रही है। संविधान में एलजी को प्रशासन नहीं बल्कि महज कार्यकारी बताया है। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सत्ता हासिल करने में नाकाम भाजपा अब पर्दे के पीछे से एलजी के सहारे दिल्ली पर राज करना चाहती है।
बिल संविधान की हत्या, खत्म कर दें दिल्ली का विशेष दर्जा: भगवंत मान
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने केंद्र पर दिल्ली की जनता से चुनाव में मिली हार का बदला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह बिल संविधान की हत्या है। जब सरकार उपराज्यपाल ही चलाएंगे तो फिर विधानसभा की जरूरत क्या है। केंद्र सरकार को दिल्ली का विशेष दर्जा भी खत्म कर देना चाहिए। संविधान किसी भी राज्य के विधानसभा को निर्णय लेने का अधिकार देता है। चुनी हुई सरकार को शक्तियां देता है। मगर केंद्र सरकार विधानसभा और चुनी हुई सरकार की शक्तियों को उपराज्यपाल का गुलाम बनाना चाहती है। यह बिल देश की संघीय ढांचे और संविधान का अपमान है।
केजरीवाल सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की सदैव रक्षा की है
मान ने कहा, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है। संविधान के लिए जरूरी 15 फीसदी सदस्य न होने के बावजूद केजरीवाल सरकार ने दो-दो बार विपक्ष को नेता प्रतिपक्ष का ओहदा दिया। जबकि लोकसभा लगातार दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष के पद के बिना चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही चलाना चाहती है। राज्य सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम के लिए लोगों ने तीसरी बार चुना है। केंद्र को आम आदमी पार्टी की जीत हजम नहीं हो रही।