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दिल्ली: एलजी की ‘शक्तियों’ को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच संग्राम

Tue, 23 Mar 2021 05:09 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • मीनाक्षी बोलीं, अराजकतावादियों के हाथ नहीं छोड़ सकते दिल्ली।
  • लेखी ने कहा, अमेरिका जैसा नहीं भारत का संघीय ढांचा, यहां केंद्र सर्वोपरि।
  • सुप्रिया का सवाल, आप सरकार ने कुछ नहीं किया तो भाजपा हारी क्यों।
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अरविंद केजरीवाल-अनिल बैजल - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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दिल्ली में उपराज्यपाल की शक्तियों व अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या के लिए केंद्र के संशोधन विधेयक के बचाव में संसदीय क्षेत्र की भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा, राजधानी होने के नाते दिल्ली देश के लिए अहम है और इसे अराजकतावादियों के हाथ नहीं छोड़ सकते। राजधानी के विकास और विवादों के निपटारे के लिए उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या वक्त की जरूरत है। इस पर एनसीपी की सुप्रिया सुले ने सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी की सरकार ने कुछ नहीं किया तो आप हारे क्यों?

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बिल पर चर्चा के दौरान मीनाक्षी लेखी ने कहा, संविधान में एलजी ही दिल्ली के प्रशासक हैं। संविधान में पहले से ही तय है कि राज्य मंत्रिपरिषद अपने हर फैसले पर एलजी की सहमति लेगा। जहां तक देश के संघीय ढांचे की बात है तो भारत और अमेरिका के संघीय ढांचे में बहुत अंतर है। भारत के संघीय ढांचे में राज्य नहीं बल्कि केंद्र सर्वोपरि है। संघीय ढांचे को बनाए और बचाए रखने की जिम्मेदारी केंद्र की है।

उन्होंने कहा, अधिकारों की अस्पष्टता के कारण दिल्ली में स्थिति नारकीय हो गई है। बिजली का खंभा लगाने की जिम्मेदारी एमसीडी की है तो बिजली देने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की। नाली-सीवर के रखरखाव और मरम्मत का जिम्मा एमसीडी के पास है तो जल बोर्ड राज्य सरकार के अधीन है। ऐसे में बड़ी संख्या में विकास कार्य अटके पड़े हैं। राज्य सरकार आयुष्मान योजना, किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से लोगों को वंचित कर रही है। लेखी ने कहा, ऐसे में दिल्ली को बेसहारा छोड़ना गलत है। बिल की जरूरत अरसे से महसूस की जा रही थी। केंद्र सरकार हमेशा से होने वाले टकराव पर पूर्ण विराम लगाना चाहती है। यह दिल्ली और दिल्ली के नागरिकों के हित में है।
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राजधानी में हिंसा के पीछे दिल्ली सरकार का हाथ: लेखी
लेखी ने केजरीवाल सरकार को अराजकतावादी बताते हुए कहा, चाहे दिल्ली दंगे हों या कथित किसान आंदोलन, राजधानी में हिंसा में दिल्ली सरकार का परोक्ष और प्रत्यक्ष हाथ रहा है। दिल्ली दंगे में आप के पार्षदों-विधायकों की भूमिका सामने आई है। जबकि लालकिले पर तिरंगा अपमान मामले में भी राज्य सरकार की परोक्ष भूमिका है। इसी भूमिका के कारण राज्य सरकार ने दिल्ली पुलिस को डीटीसी की बसें मुहैया कराने से इंकार कर दिया।

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सिर्फ केजरीवाल के विज्ञापन पर सवाल उठाना उचित नहीं: सुप्रिया

लेखी के केजरीवाल सरकार के हर मोर्चे पर फेल होने के आरोपों पर सुले ने पूछा कि अगर ऐसा है तो भाजपा बार-बार चुनाव क्यों हार रही है। अगर केजरीवाल सरकार वाकई कुछ नहीं कर रही तो विधानसभा चुनाव में भाजपा उससे पार क्यों नहीं पा रही? केजरीवाल सरकार में कुछ तो है कि वह विधानसभा की 70 में से कभी 67 तो कभी 62 सीटें जीतती हैं।

विज्ञापन के सवाल पर सुले ने कहा, यह हर राज्य और केंद्र की समस्या है। सभी सरकारें विज्ञापन पर भारी खर्च करती हैं। अगर लेखी और यह सदन सहमत हो तो जरूरी विज्ञापनों के इतर अन्य विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए। सुले ने कहा, केंद्र का दायित्य राज्यों के हितों की रक्षा करना है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की रक्षा करने की है। हालांकि इस बिल के जरिए सरकार राज्य और लोकतंत्र दोनों का नुकसान कर रही है।

पूर्ण राज्य की बात करने वाले विधानसभा को बना रहे पंगु : मनीष
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, कभी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अभियान चलाने वाली भाजपा अब इसके उलट दिल्ली सरकार के सारे अधिकार छीनने पर आमदा है। वर्ष 2003 में तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने लुटियन जोन को छोड़ कर शेष दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने वाला बिल भी पेश किया था। अब भाजपा की वही सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा देना तो दूर राज्य सरकार के सारे अधिकार छीन रही है। संविधान में एलजी को प्रशासन नहीं बल्कि महज कार्यकारी बताया है। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सत्ता हासिल करने में नाकाम भाजपा अब पर्दे के पीछे से एलजी के सहारे दिल्ली पर राज करना चाहती है।

बिल संविधान की हत्या, खत्म कर दें दिल्ली का विशेष दर्जा: भगवंत मान
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने केंद्र पर दिल्ली की जनता से चुनाव में मिली हार का बदला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह बिल संविधान की हत्या है। जब सरकार उपराज्यपाल ही चलाएंगे तो फिर विधानसभा की जरूरत क्या है। केंद्र सरकार को दिल्ली का विशेष दर्जा भी खत्म कर देना चाहिए। संविधान किसी भी राज्य के विधानसभा को निर्णय लेने का अधिकार देता है। चुनी हुई सरकार को शक्तियां देता है। मगर केंद्र सरकार विधानसभा और चुनी हुई सरकार की शक्तियों को उपराज्यपाल का गुलाम बनाना चाहती है। यह बिल देश की संघीय ढांचे और संविधान का अपमान है।

केजरीवाल सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की सदैव रक्षा की है
मान ने कहा, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है। संविधान के लिए जरूरी 15 फीसदी सदस्य न होने के बावजूद केजरीवाल सरकार ने दो-दो बार विपक्ष को नेता प्रतिपक्ष का ओहदा दिया। जबकि लोकसभा लगातार दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष के पद के बिना चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही चलाना चाहती है। राज्य सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम के लिए लोगों ने तीसरी बार चुना है। केंद्र को आम आदमी पार्टी की जीत हजम नहीं हो रही।
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