भारत सरकार ने फैसला लिया है कि वह नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में आयोजित होने वाले पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर किसी भी आधिकारिक प्रतिनिधि को नहीं भेजेगा। सूत्रों के अनुसार सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि पड़ोसी देश ने कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को आमंत्रित किया है।
एक अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के अधिकारी 23 मार्च को मनाए जाने वाले पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर होने वाले कार्यक्रम से दूरी बनाए रखेंगे। अधिकारी ने कहा, ‘भारत सरकार ने नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग में आयोजित होने वाले पाकिस्तानी राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम में किसी भी आधिकारिक प्रतिनिधि को नहीं भेजने का फैसला किया है।’
उन्होंने बताया कि यह फैसला इसलिए किया गया है क्योंकि पाकिस्तान ने इस कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को आमंत्रित करने का निर्णय लिया। यह फैसला तब लिया गया है कि जब पुलवामा हमले और पाकिस्तान के बालाकोट में 26 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर भारत के हवाई हमले के बाद दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
पाकिस्तान ने हवाई हमले के अगले दिन भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का असफल प्रयास करते हुए बदले की कार्रवाई की। पाक स्थित आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत पुलवामा हमले के बाद से ही आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए उस पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर अपना प्रतिनिधि न भेजे जाने पर कहा, 'वह अलगाववादी और हुर्रियत नेताओं को बुला रहे हैं इसलिए हम अपना प्रतिनिधि नहीं भेजेंगे।' नीरव मोदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगी।
उन्होंने नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि आपको इसके लिए सामने वाली सरकार पर निर्भर होना पड़ता है। सरकार उसे भारत लाने को लेकर प्रतिबद्ध है और इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।