देश में कितना बढ़ गया हवाई किराया, सरकार ने कब दिया दखल
इंडिगो का संकट बढ़ने के साथ ही 5 दिसंबर को हवाई किराया नई ऊंचाइयों पर था। लखनऊ से बंगलूरू का किराया 69 हजार रुपये से ऊपर हो गया। वहीं, पटना से बंगलूरू का जो किराया 7 हजार से 9 हजार रुपये के बीच होता था, वह 60 हजार से 72 हजार रुपये तक दर्ज हुआ। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने उड़ान किरायों पर सीमा लगाने का निर्णय लिया।
सरकार ने कितनी कर दी हवाई किराए की सीमा?
नागर विमानन मंत्रालय ने इंडिगो संकट के बीच यात्रियों की समस्या को देखते हुए बढ़ते किराए को कम करने के लिए अपनी नियामक शक्तियों को लागू किया। सरकार ने दूसरी एयरलाइन के किराये में हुए बेहताशा बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए सभी प्रभावित रूट्स पर सही और वाजिब किराया सुनिश्चित करने को कहा और इसकी सीमाएं भी तय कर दीं।
अब जानें- सरकार के निर्देशों का मौजूदा समय में कितना असर?
नए हफ्ते के पहले दिन यानी 8 दिसंबर (सोमवार) को अलग-अलग एयरलाइंस और ट्रैवल एग्रीगेटर वेबसाइट्स की ओर से जो डाटा जुटाया गया है, उसके मुताबिक, इंडिगो का संकट कम होने और सरकार की तरफ से सीमा तय किए जाने के बाद अधिकतर मार्गों पर किराया स्थिर हुआ है।
हवाई किरायों की जांच में सामने आता है कि इंडिगो एयरलाइंस की संचालन समस्या के कम होने और सरकार की तरफ से किराए पर कैप लगाए जाने के बाद से ही हवाई यात्रा की दरें स्थिर हुई हैं। हालांकि, कुछ मार्गों पर यह किराया अब भी सरकार की तरफ से निर्धारित कैप से ज्यादा है। जानकारों के मुताबिक, अधिकतर एयरलाइन कंपनियों ने अपने हवाई किरायों को कम करने का निर्णय ले लिया है। इसकी वजह से उनके किराये में संकट के दौर के मुकाबले काफी कमी दर्ज की गई है। हालांकि, अधिकतर रूट्स पर सरकार ने जितना किराया निर्धारित किया है, उसके मुकाबले यात्रियों को थोड़ी अतिरिक्त राशि इसलिए चुकानी पड़ रही है। इसकी मुख्यतः तीन वजहें हैं...
1. यूजर डेवलपमेंट फीस (यूडीएफ)
सरकार ने जारी दिशा-निर्देशों में साफ किया है कि एयर फेयर कैप के मानक कुछ एयरपोर्ट्स की तरफ से चार्ज किए जाने वाले यूजर डेवलपमेंट फीस पर लागू नहीं होंगे। यानी हवाई अड्डे इन्हें अपने आधुनिकीकरण के लिए लगाना जारी रखेंगे। चूंकि एयरपोर्ट को यह फीस हवाई यात्रियों के जरिए मिलती है, इसलिए एयरलाइन कंपनियां पहले ही किरायों में इस फीस को जोड़ कर रखती है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बंगलूरू, आदि कुछ हवाई अड्डों ने यह यूडीएफ लगाना जारी रखा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तरह की फीस और टैक्स उपभोक्ताओं के लिए हवाई टिकट के दामों को 20 से 40 फीसदी तक बढ़ा देते हैं। हालांकि, यह एयरपोर्ट, बुकिंग स्टेटस (इकोनॉमी, प्रीमियम और बिजनेस क्लास) और कुछ अन्य स्थितियों पर निर्भर होता है।
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