देश में कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए सरकार ने 31 मई लॉकडाउन लागू किया हुआ है। इस कारण देश की अर्थव्यवस्था पर इसका खासा असर देखने को मिला है। वहीं, इसके बाद भी कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सही कदम उठा रही है। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर बिमल जालान भी शामिल हैं।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने सरकार द्वारा कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए उठाए गए कदमों को काफी सकारात्मक करार दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन उपायों से अर्थव्यवस्था में गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी।
वर्तमान स्थिति 1991 के भुगतान संतुलन के संकट जैसी नहीं
जालान ने कहा कि आज स्थिति 1991 के भुगतान संतुलन के संकट जैसी नहीं है। आज भारत के पास संसाधन हैं। साथ ही किसी भी संकट के लिए विदेशी मुद्रा का भंडार है। जालान ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिन उपायों की घोषणा की है वे काफी सकारात्मक हैं।
जालान ने एक साक्षात्कार में कहा कि आपने सही कहा कि ये सभी आपूर्ति पक्ष के उपाय हैं, मांग पक्ष के नहीं। वृहद आर्थिक दृष्टि से देखा जाए, तो अर्थव्यवस्था में आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि ऊंचे राजकोषीय घाटे से वृद्धि दर भी ऊंची होगी।
यह भी पढ़ें: मुंबई और पुणे में जारी रह सकता है लॉकडाउन, सीएम उद्धव ठाकरे ने दिए संकेत
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से तुलना सही नहीं
सरकार ने कोविड-19 संकट के बीच इसी महीने 20.97 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसमें रिजर्व बैंक के 8.01 लाख करोड़ रुपये के तरलता उपाय भी शामिल हैं। इन आलोचनाओं की अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में भारत का आर्थिक पैकेज काफी कम है, जालान ने कहा कि विकसित और विकासशील देशों में अंतर होता है।
जालान ने कहा कि यदि आप विकसित देशों को देखें, तो उनकी वृद्धि दर दो या तीन फीसदी है, लेकिन इसके बावजूद उनकी प्रति व्यक्ति आय काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में छह से सात फीसदी की ऊंची वृद्धि दर में आपको महंगाई को भी काबू में रखना होता है, जिससे प्रति व्यक्ति आय बढ़े।
हमारे पास संकट के निपटने के लिए संसाधन और विदेशी मुद्रा भंडार है
यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा संकट 1991 के भुगतान संतुलन के संकट जैसा ही बड़ा है, जालान ने कहा कि 1991 का आर्थिक संकट अलग तरह का था। हमें गंभीर भुगतान संतुलन की समस्या से जूझना पड़ा था। उस समय हमारे पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार नहीं था।
पूर्व सांसद जालान ने कहा कि आज स्थिति अलग है। आज हमारे पास संसाधन और काफी बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है। आज हमारे पास क्षमता है कि हम जो करना चाहते हैं, कर सकें।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह केंद्रीय बैंक द्वारा घाटे के मौद्रिकरण के पक्ष में हैं, जालान ने कहा कि यह पक्ष या विपक्ष की बात नहीं है। यह स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ स्थितियों में आप मौद्रिकरण कर सकते हैं, अन्य परिस्थितियों में आप बाजार और कर्ज लेने वालों को नकदी उपलब्ध करते हैं।
मौद्रिकरण से तात्पर्य केंद्रीय बैंक द्वारा आपात स्थिति में सरकार के लिए मुद्रा की छपाई से है, जिससे राजकोषीय घाटे को कम किया जा सके।
देश की वृहद आर्थिक स्थिति के बाबत जालान ने कहा कि वृद्धि दर में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। पिछले साल यह 5.2 फीसदी थी, इस साल यह शून्य से एक या दो फीसदी नीचे से अधिक से अधिक दो फीसदी रहेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।