2022 तक सबको घर के वादे के लक्ष्य को पूरा करने लिए केन्द्र सरकार जल्द ही नई रेंटल पॉलिसी लाने की तैयारी में है। इस पॉलिसी के तहत शहरों में आने वाले लोगों के लिए सरकारी संस्थाओं से मकान किराए पर लेने की सुविधा होगी। साथ ही किराये की मकान को आसान किस्तों में खरीदने का भी विक्लप होगा।
इस नई पॉलिसी में किराएदार को मकान खरीदने के लिए बनाई नई स्कीम का नाम नाम ‘रेंट टू ओन’ है। इस स्कीम केन्द्र सरकार की नेशनल अर्बन रेंटल हाउसिंग पॉलिसी के तहत लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय शहरी विकास और आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि इस ऐक्ट को मंजूरी के लिए जल्दी ही कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके लिए सरकार निजी जमीन पर बने मकानों को खरीदने पर भी गरीब लोगों को 1.5 लाख रुपए की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। वेंकैया नायडू ने कहा कि अब तक हम 2008 शहरों और कस्बों में 17.73 लाख शहरी गरीबों के लिए आवासों को मंजूरी दे चुके हैं।
वहीं, वेंकैया नायडू ने कहा कि 2022 तक सबको घर के वादे को पूरा करने का लक्ष्य है। 2019 तक 15 राज्यों समेत केंद्र शासित प्रदेशों में इस लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। इसके बाद 2022 तक अन्य सभी राज्यों में इस टार्गेट को पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'रेंट टु ओन' ऐक्ट की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद राज्य इस पर काम कर सकेंगे।
'रेन्ट टू ओन' स्कीम का लाभ
इस स्कीम के तहत शुरुआत में कुछ निश्चित वर्षों के लिए घर लीज पर दिया जाएगा। खरीददार को हरेक महिना ईएमआई के बराबर किराया बैंक में जमा करना होगा। इसमें कुछ किराये के तौर पर होगा और बाकी जमा होगा। खरीददार की ओर से जमा की गई ईएमआई की राशि जब 10 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी तब मकान उसके नाम पर रजिस्टर हो जाएगा। यदि लीज पर लेने वाला व्यक्ति रकम जमा नहीं कर पाता है तो सरकार इस मकान को दोबारा बेच देगी। इसके अलावा किराये के साथ जमा की जाने वाली राशि किरायेदार को बिना ब्याज के वापस लौटा दी जाएगी।