निजी क्षेत्र भी होगा दायरे में
प्राइवेट सेक्टर को भी इस योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए राज्यों एवं निजी संस्थानों को केंद्र सरकार के साथ एमओयू साइन करना होगा। चूंकि इस साल की परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित हो चुका है, लिहाजा अगले साल नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी, पहली सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) आयोजित करेगी।
मोदी सरकार में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को यह बात कही है। उनके अनुसार, बहुत जल्द नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन किया जा रहा है।
मौजूदा परीक्षा प्रणाली में संस्थागत तौर पर कई सारी दिक्कतें हैं। जैसे विभिन्न परीक्षाओं के लिए भर्ती बोर्ड अलग-अलग होते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड अलग है, एसएससी अपने तरीके से विभिन्न पदों पर भर्ती करती है।
इसी तरह बैंकिंग सेक्टर के लिए भी अलग से भर्ती बोर्ड बना है। परीक्षा का स्तर भी अलग अलग होता है। भर्ती प्रक्रिया में तय मापदंडों का अभाव देखा गया है। आवेदकों में सुरक्षा की भावना एक बड़ा सवाल बन कर खड़ी हो जाती है। महिला आवेदकों को अधिक मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
हमारे समाज में आज भी कोई महिला किसी दूसरे जिले या प्रदेश में कोई परीक्षा देने जाती है, तो उसके साथ परिवार से एक-दो लोग साथ जाते हैं। यात्रा के अलावा दूसरे शहर में आने-जाने और ठहरने का खर्च उठाना पड़ता है। इसके बाद रिजल्ट आने में बहुत समय लगता है। भर्ती प्रक्रिया लंबी हो जाती है। इससे आवेदकों में निराशा पनपने लगती है।
नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का यह होगा फायदा
एनआरए जब अगले साल से सामान्य पात्रता परीक्षा आयोजित करेगा तो आवेदकों को कई तरह का फायदा होगा। एनआरए एक स्वायत्त संस्था रहेगी। इसके तहत एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन, तीनों की प्रारंभिक परीक्षा एक साथ हो सकेगी। सभी के लिए एक ही तरह का मापदंड होगा।
विभिन्न भाषाओं में टेस्ट संभव हो सकेगा। हर जिले में एक परीक्षा केंद्र स्थापित किया जाएगा। मौजूदा समय में आवेदकों को अपने घर से बहुत दूरी पर परीक्षा केंद्र अलॉट होता है। जैसे हरियाणा का परीक्षार्थी कोलकाता या मुंबई में जाकर परीक्षा देता है, तो उसे कई दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
एनआरए में देश के सभी 700 जिलों में परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सरकार के पास पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर और स्टाफ है। कहीं कोई परेशानी नहीं आएगी। केंद्र सरकार में 'बी' और 'सी' ग्रुप के 1.25 लाख पदों पर भर्ती होती है।
ढाई करोड़ से ज्यादा आवेदक इन परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं। इस तरह की पचास भर्ती परीक्षाएं हर साल आयोजित होती हैं। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में डेढ़ से दो साल का समय लगता है।
नई भर्ती प्रक्रिया की खासियतें
सीईटी, सामान्य परीक्षा के जरिए आवेदकों की छंटनी होगी। हर आवेदक को उसके अंकों के आधार पर स्कोर मिलेगा। सीईटी के स्कोर को विभिन्न भर्ती एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा। वे एजेंसियां अंतिम चयन प्रक्रिया में इस स्कोर का इस्तेमाल करेंगी। इस प्रक्रिया में आवेदक एक साथ ही कई परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा दे सकेगा।
कहीं कोई तिथि मिलने का झंझट नहीं होगा। अर्थात एक दिन में एक ही परीक्षा होगी। आवेदक को मिला स्कोर तीन साल तक मान्य रहेगा। सीईटी के सर्वश्रेष्ठ स्कोर को मान्यता दी जाएगी। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का सामान्य रजिस्ट्रेशन पोर्टल होगा। इसमें प्रश्नपत्र बैंक, सेंट्रल सर्वर, टेस्ट सेंटर, टेस्ट नोड्स और स्कोर आदि रहेगा।
कॉमन रजिस्ट्रेशन के अलावा सिंगल फी, सामान्य पैटर्न, स्टैंडर्ड प्रश्न पत्र, सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, त्वरित परिणाम और बेहतर नतीजे, इन सबके चलते आवेदकों की राह आसान बन जाएगी। खास बात है कि नई परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक होने की संभावना पूरी तरह खत्म होगी। आवेदकों को अपनी पसंद से परीक्षा केंद्र मिलेगा।
कब टेस्ट देना है और किस जगह पर देना है, ये सब बातें आवेदक तय करेंगे। आवेदक को चार-पांच सेंटर की पसंद बतानी होगी। सीईटी के स्कोर का इस्तेमाल सेना, अर्धसैनिक बल और विभिन्न राज्यों के भर्ती बोर्ड कर सकेंगे। इससे युवाओं को बार-बार परीक्षा आवेदन और फीस जमा कराने से निजात मिलेगी।