योगेश मीणा ने भले ही परिजनों की सुरक्षित वापसी को लेकर ट्वीट किया हो, लेकिन इटली में फंसे परिजन असल में राजस्थान के झुंझुनू की नवलगढ़ निवासी रविकुमार बागरी के हैं। अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत में रविकुमार ने अपने परिजनों की वापसी को लेकर चिंता जाहिर की।
रविकुमार नवलगढ़ में ई-मित्र संचालक का काम करते हैं। वह बताते हैं कि उनके परिजन सालों से इटली में हैं। किसी को 15 साल तो किसी को 10 या 3 साल हो गए हैं, जबकि कुछेक तो एक साल पहले ही वहां गए हैं।
रवि बताते हैं कि इटली में उनके भाई, चाचा समेत परिवार के आठ लोग हैं और उनके खटीक समाज के करीब 40 लोग रह रहे हैं। इनमें से अधिकांश वहां होटलों में काम करते हैं। रवि कहते हैं इटली में कोरोना तेजी से फैल रहा है। परिजन पिछले 20 दिनों से घर में बंद हैं और हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। अभी तक उनमें से कोई वायरस से पीड़ित नहीं है। सुरक्षा के लिहाज से कोई सरकारी मदद भी नहीं पहुंची है। ना ही मास्क दिए गए हैं।
वहीं लोकसभा में विदेश मंत्री के इटली सरकार से संपर्क करने के बयान के संबंध में पूछने पर रवि ने कहा कि बयान अपनी जगह है पर अभी तक कोई संपर्क नहीं किया गया है। हमारी सरकार से यही गुहार है कि इटली में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द वापस लाया जाए।
इटली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर वहां की सरकार ने काफी सख्त कदम उठाए हैं। वहां मौजूद रवि के परिजनों ने अमर उजाला डॉट कॉम से हुई खास बातचीत में बताया कि यहां घर से बाहर निकलने पर पाबंदी है। बेवजह घूमने पर लोगों पर 25000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।
उनका कहना था कि भारत लौटने के लिए हमसे संक्रमित नहीं होने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। परंतु इसे बनवाने के लिए सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है। यही वजह है कि हम सभी यहां फंसकर रहने को मजबूर हो गए हैं।