किसान क्रांति यात्रा के एक दिन बाद ही केंद्र सरकार ने रबी की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। नई बढ़ोतरी के तहत गेहूं का एमएसपी 105 रुपए बढ़ कर 1840 रुपए हो गया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा कि उनकी बुवाई की लागत इससे कहीं ज्यादा है।
किसान क्रांति यात्रा के दबाव के चलते बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति यानी सीसीईए ने रबी फसलों के न्यूनतम मूल्य के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। इससे पहले मंगलवार को किसानों ने सरकार से 15 मांगें की थीं, जिसमें से 7 मांगों को सरकार ने मान लिया।
प्रस्ताव के मुताबिक चने का एमएसपी भी 220 रुपए बढ़ाकर 4,620 रुपए कर दिया गया है। मसूर का 2018-19 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 225 रुपए बढ़कर 4,475 रुपए हो गया है। वहीं, सरसों का दाम 200 रुपए बढ़ाकर 4200 रुपए, जौ का नया एमएसपी 30 रुपए बढ़कर 1,440 रुपए और कुसुंभ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 845 रुपए से बढ़ा कर 4,945 रुपए कर दिया है।
वहीं भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक के मुताबिक सी2 प्लस 50 फॉर्मूले के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य तकरीबन 3 हजार रुपए होता है। वहीं फसल वर्ष 2017-18 में गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं आज के वक्त में डीजल, फर्टिलाइजर के कीमतों में बढ़ोतरी होने से गेहूं की लागत ही अकेले 1800 रुपए बैठती है, जबकि मंडी में विक्रेता एमएसपी से डेढ़ सौ रुपए नीचे की खरीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन की मांग है कि एमएसपी को वैधानिक बनाया जाए और खरीद की गांरटी दी जाए।