नासा ने उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए एक वीडियो जारी किया है। इससे केरल में बारिश और बाढ़ की स्थिति की भयावहता का पता चलता है। भारत में आम तौर पर इस समय में ग्रीष्मकालीन मॉनसून आता है और क्षेत्र में भारी बारिश होती है। हालांकि सामान्य मॉनसून के दौरान समय-समय पर कम दबाव के क्षेत्र बन सकते हैं। इस कारण अधिक बारिश हो सकती है।
नासा ने एक बयान में कहा है कि हिमालय की भौगोलिक स्थिति और पश्चिमी घाट के कारण दक्षिणी पश्चिमी तट पर भारी बारिश हो रही है। यह पर्वतश्रेणी हिमालय जितनी बड़ी तो नहीं है लेकिन भारत के पश्चिमी तट के समानांतर चलती है। इसकी कई चोटियां 2,000 मीटर से भी अधिक ऊंची हैं।
इस तरह से देखें तो पश्चिमी घाट की माकूल स्थिति के कारण भारत के पश्चिमी तटीय इलाकों में अधिक बारिश होती है। दक्षिण पश्चिम मानसून के तहत उत्तरी हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली गर्म हवाओं में निहित नमी इस पर्वत श्रेणी से टकराती है, जिससे अधिक बारिश होती है।
राज्य में मस्जिद बनी हिंदुओं का सहारा
बाढ़ के हालात ने धर्म और जाति के अंतर को दूर कर दिया है। उत्तरी मलप्पुरम की एक मस्जिद ने 17 विस्थापित हिंदू परिवारों को शरण दी है। इसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। चलियार गांव के अकमपाडम में स्थित जुमा मस्जिद 8 अगस्त को उत्तरी जिलों में बाढ़ आने के बाद से राहत शिविर में तब्दील हो गई है।
धर्म और जाति से परे विस्थापित लोगों को मस्जिद में सोने के लिए आश्रय दिया जा रहा है। उन्हें कैंटीन में तैयार खाना मिल रहा है। घर वापसी के समय दाल, चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी दी जा रही है। चलियार ग्राम पंचायत प्रमुख पी टी उस्मान ने कहा कि जुमा मस्जिद में जिन 78 लोगों ने शरण ली, उनमें से अधिकतर हिंदू हैं।
वर्षा और बाढ़ से उबर रहे केरल में बुधवार को बकरीद बिल्कुल फीकी रही। राज्यभर में मस्जिदों में सैकड़ों श्रद्धालु कुर्बानी का त्योहार मनाने पहुंचे। उन लोगों के लिए विशेष नमाज अदा की गई जिन्होंने अपनी जान गंवाई है और उनके लिए भी, जो बाढ़ की मार झेल रहे हैं। निचले इलाकों में अब भी पानी जमा होने और बचाव एवं राहत कार्य जारी रहने के कारण कई स्थानों पर विशेष ईदगाहों में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही।
बिना चेतावनी बांध के गेट खोलने पर जांच की मांग
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने बुधवार को आरोप लगाया कि बाढ़ और बारिश से बर्बाद हुए राज्य में कई बांधों के गेट पर्याप्त चेतावनी दिए बगैर खोले गए थे। इसके कारण ज्यादातर जिलों में बाढ़ आ गई। साथ ही बड़े पैमाने पर तबाही भी मची। उन्होंने आरोपों की न्यायिक जांच की भी मांग की।