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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अडानी, टाटा, एस्सार को राहत पहुंचाने की तैयारी: कांग्रेस 

Thu, 23 Aug 2018 03:44 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (फाइल फोटो)
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कांग्रेस ने केंद्र और गुजरात की भाजपा सरकार पर तीन पूंजीपतियों की बिजली कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लघंन कर लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और गुजरात के नेता बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेस कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्री के कहने पर गुजरात सरकार ने अडानी, टाटा और एस्सार कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बिजली दरें बढ़ाए जाने को लेकर अधिसूचना जारी जिसका बोझ पांच राज्यों के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।  

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जयराम रमेश ने कहा कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट इन तीनों कंपनियों को सरकार के साथ हुए करार के मुताबिक 2.40 पैसे- 2.80 पैसे से अधिक कीमतें बढ़ाने से इंकार कर दिया था। जबकि सूट-बूट और लूट वाली पूंजीपतियों की सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और आदेश का उल्लंघन करते हुए चाहती है कि इन कंपनियों को राहत मिले। राज्य विद्युत नियामक आयोग और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग भी समझौते के अतिरिक्त बिजली दरें बढ़ाने के खिलाफ थे।  

उन्होंने बताया कि फरवरी 2007 में गुजरात ऊर्जा विकास निगम ने बिजली खरीदी के चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए।  दो अडानी की कंपनियों के साथ दो हजार मेगावाट की खरीद के लिए,  एक टाटा कंपनी के साथ 1800 मेगावाट और एक एस्सार कंपनी के साथ 1000 मेगावाट के लिए। समझौते के मुताबिक इन कंपनियों को 2.40 पैसे से लेकर 2.80 पैसे के बीच कीमतें लेने थीं। बिजली गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा को दी जानी थी और ये बिजलीघर गुजरात में थे। 

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बिजली का उत्पादन 2007 में शुरू हुआ और पांच साल बाद इन कंपनियों ने विद्युत विनियामक आयोग जाकर दरें बढ़ाने पर दबाव बनाना शुरू किया। 2012 से 2017 तक पांच साल इस पर बहस हुई। आयोग के बाद अंत में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2017 फैसला सुनाया। फैसले में अडानी, टाटा और एस्सार को निर्देश दिए गए कि बिजली की दर वही होनी चाहिए जो समझौते में थीं।

 इन कंपनियों की एप्लिकेशन की मंजूरी नहीं दी और कहा कि बिजली दर बढ़ाने के लिए कोई कारण नहीं है। अंतिम फैसला आने के बाद भी पसंदीदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए तीन जुलाई 2018 को एक अधिसूचना जारी की गई है। जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार के साथ बैठक करने के बाद गुजरात सराकर ने एक समिति का गठन करने का फैसला लिया है।

तीन सदस्यों की गठित समिति सरकार को सुझाव और सिफारिश करेगी कि इन तीन कंपनियों को राहत कैसे पहुंचाई जा सकती है जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लघंन है। 

जब सुप्रीम कोर्ट ने राहत का दरवाजा बंद कर दिया है तो मोदी सरकार राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर उसे खोलने में लगी हुई है। समिति कंपनियों के हित में रिपोर्ट देगी और पांच राज्यों के उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा।  
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