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नए सेना प्रमुख की नियुक्ति पर विपक्ष-भाजपा आमने सामने

Sun, 18 Dec 2016 09:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेना प्रमुख बिपिन रावत - फोटो : Social Media
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नए सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के हमले की निंदा करते हुए बीजेपी ने रविवार को कहा कि सैन्य बलों के मामले में किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने कहा कि नए सेना प्रमुख को पांच सीनियर अधिकारियों के पूल में से चुना गया है, जिनमें से सभी सक्षम थे। रावत की नियुक्ति को दूसरे अधिकारियों के खिलाफ नकारात्मक राय के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। 
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विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस नए सेना प्रमुख की नियुक्ति का राजनीतिकरण कर रही है, क्योंकि वह लगातार राजनीतिक हारों से परेशान है। वरिष्ठता क्रम को नजरअंदाज कर रावत को चुने जाने पर घिरी बीजेपी के नेशनल सेक्रेटरी श्रीकांत शर्मा ने कहा, 'वह सभी सक्षम अधिकारी थे, लेकिन मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर सरकार ने रावत को सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के तौर पर चुना। हम सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि वे इस नियुक्ति का राजनीतिकरण न करें।'

श्रीकांत शर्मा ने कहा, 'यदि किसी दल ने लोकतांत्रिक मूल्यों का सबसे ज्यादा हनन किया है, तो वह कांग्रेस है। बीजेपी ने हमेशा लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन किया है।' 
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सेना प्रमुख की नियुक्ति पर विपक्ष ने उठाए सवाल

- फोटो : AmarUjala
गौरतलब है कि पीएमओ ने शनिवार को ले. जनरल बिपिन रावत को नया सेना प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की। ले. जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे मौजूदा जनरल दलबीर सिंह की जगह लेंगे। ले. रावत को वरिष्ठता का क्रम तोड़ते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों से आगे रखते हुए यह दायित्व सौंपा गया है, जिस कारण विपक्षी दल अब उनकी नियुक्ति पर सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, 'हमें ले. जनरल रावत की योग्यता पर संदेह नहीं है, लेकिन सरकार को यह जरूर बताना होगा कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति में 3 वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नजरअंदाज किया गया।' एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा, 'सेना के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।'

वहीं, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि ले. जनरल रावत के पास युद्धक्षेत्र का खासा अनुभव है और उन्होंने बीते 3 दशकों में सेना में हर स्तर पर अपनी सेवाएं दी हैं। उभरती चुनौतियों से निपटने में उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त पाया गया।
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33 साल पहले भी दरकिनार हुई वरिष्ठता

फाइल फोटोः इंदिरा गांधी
वैसे यह पहली बार नहीं है कि जब किसी वरिष्ठ अधिकारी को नजरअंदाज कर किसी निचले क्रम के अधिकारी को सेना का कमान सौंपा गया हो। 33 साल पहले, 1983 में इंदिरा गांधी ने ले. जनरल ए. एस वैद्य को वरिष्ठता के क्रम को दरकिनार कर सेना प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस वक्त लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी थे। एसके सिन्हा ने इंदिरा गांधी के फैसले से नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दे दिया था।

इससे पहले इंदिरा गांधी ने 1972 में भी ऐसा किया था। 1972 में इंदिरा गांधी ने लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत को दरकिनार करते हुए जी.जी. बेवूर को सेना प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी थी। बता दें कि लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत उस वक्त देश भर में खासा लोकप्रिय थे और दूसरे विश्व युद्ध के लिए विक्टोरिया क्रॉस अवॉर्ड भी जीत चुके थे।
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