बता दें कि मोईन कुरैशी मामले में रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल, सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना, सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसाद की आपसी बातचीत सामने आई थी। राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच कर रहे अधिकारी एके बस्सी ने तो सुप्रीम कोर्ट में ये सब बातें लिखित में दे दी थी।
अस्थाना, जो कि एजेंट की भूमिका को अच्छी तरह जानते थे, इसके बावजूद उन्होंने ईडी के अधिकारी राजेंद्र पाल उपाध्याय (आईपीएस), राजेश्वर सिंह (आईपीएस) और विकास मेहता का नाम विदेशी सिमकार्ड इस्तेमाल करने के मामले में सार्वजनिक कर दिया।
राकेश अस्थाना ने आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी और कैबिनेट सचिव को जो शिकायत दी थी, उसमें यह बात लिखी थी कि उक्त तीनों अधिकारी नेपाल के सिमकार्ड का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक लिख दिया कि राजेश्वर सिंह के दुबई निवासी दानिश शाह के साथ संबंध हैं।
अस्थाना के पत्र में शाह को कथित तौर से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) का एजेंट बताया गया था। यह भी सामने आया कि उसकी पत्नी के पास पाकिस्तान का पासपोर्ट है। इसके साथ ही कहा गया कि शाह की पत्नी का चचेरा भाई पाकिस्तान में बड़ा कारोबारी है।
हालांकि बाद में इस बात पर वित्त मंत्रालय और तत्कालीन ईडी निदेशक करनैल सिंह के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई थी। करनैल सिंह के हस्तक्षेप के चलते राजेश्वर सिंह के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बताया गया कि उनके बीच प्रोफेशनल रिश्ते थे, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
कुछ दिन बाद दानिश शाह ने एक साक्षात्कार में कहा था कि वे ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह को करीब 15 साल से जानते हैं। मैने ईडी के कई केस जो कि दुबई से संबंधित थे, को सुलझाने में सिंह की मदद की थी। इस मामले के सामने आने के बाद ईडी को कई मामलों में मदद पहुंचाने वाले दो अन्य एजेंट भी पीछे हट चुके हैं।