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उड़ी हमले के बाद सरकार ने दिया सेना को सुरक्षा ढांचे को दुरुस्त करने का निर्देश

Tue, 20 Sep 2016 12:30 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
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Uri Attack: Last salute to the martyrs in tears, Family & People burst into tears - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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उड़ी में सेना के शिविर पर आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत अन्य रणनीतिकारों के माथे पर बल हैं। उच्च स्तर पर किसी को यह समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे चार आतंकियों ने घुसपैठ करके इतनी संख्या में सेना के जवानों को हताहत कर दिया। बताते हैं इसका कोई ठोस जवाब सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह के पास भी नहीं है। लिहाजा सेना को उच्च स्तर पर निर्देश दिया गया है कि वह अपने शिविरों के सुरक्षा ढांचे की समीक्षा करे।
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उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि सरकार को सैन्य परिसरों की सुरक्षा में हो रही लापरवाही पच नहीं है। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमले के दौरान भी बड़ी लापरवाही सामने आई थी और उड़ी में सैन्य शिविर पर हमले में भी इसे दोहराया गया। बताते हैं उच्चस्तर की बैठक में सरकार ने सेना को स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह सुरक्षा के ढांचे को अमेरिकी की सेना की तर्ज पर फुल प्रूफ बनाए। स्टैंडर्ड आपरेशन प्रोसीजर को दुरुस्त करे। ताकि उसके आस-पास कोई गैर वांछित परिंदा पर भी न मार पाए। हालांकि इस बारे में सेना की तरफ से कहा गया है कि उड़ी में हमला फिदाईन आतंकियों ने किया था। तर्क यह था कि जो खुद मरने पर उतारू हो, उसे रोकना मुश्किल है, लेकिन शीर्ष स्तर इससे संतुष्ट नहीं हुआ। रणनीतिकारों का मानना है कि हर सूरत में हमला और उसकी तीव्रता को फुलप्रूफ सुरक्षा मानदंडों के जरिए कम किया जा सकता है।

बिहार बटालियन को तंबू में टिकाने पर भी सवाल

सवाल बिहार बटालियन को तंबू में टिकाने पर भी उठा है। सूत्र बताते हैं कि  उड़ी में जगह की कोई समस्या नहीं है। सेना के जिन तंबुओं को निशाना बनाया गया है, उसमें रहने वाले सैनिकों को पक्के आवासीय बिल्डिंग में ठहराने का भी पूरा इंतजाम था। फिर भी सैनिक खुले में क्यों ठहराए गए? ठहराए गए तो सुरक्षा के घेरे का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? बताते हैं आने वाले समय में सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग उड़ी में सेना शिविर पर हुए इस आतंकी हमले, सैन्य सुरक्षा तैयारी तथा कहां हुई चूक पर एक रिपोर्ट तैयार करके सौंपेंगे। इसके लिए उन्होंने सैन्य कमांडरों को निर्देष भी देना शुरू कर दिया है।
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गले के नीचे न उतरने वाले सवाल

Uri Attack: Last salute to the martyrs in tears, Family & People burst into tears - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
-उड़ी का सामरिक महत्व है। यहां डोगरा बटालियन नियंत्रण रेखा पर तैनाती के लिए जा रही थी और बिहार बटालियन नीचे उतर रही थी। जब भी सेना के टुकड़ी की अदला-बदली होती है भारतीय सेना बेहद सतर्कता बरतती हैं।  यहां तक कि सीमा पार भी सैन्य टुकड़ी की अदला-बदली के समय भी भारतीय सेना सतर्क रहती है।

-पिछले 70 दिन से अधिक समय से कश्मीर घाटी अशांत है। बराबर आतंकी घुसपैठ की आशंका बनी है। सीमापार से लगातार हलचल तेज होने की खुफिया सूचनाएं आ रही थी।  ऐसे में आतंकी कैसे घुसपैठ में कामयाब हुए और सैन्य शिविर को निशाना बनाया?

-8 जुलाई को आतंकी बुरहान वानी को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद से अशांत जम्मू-कश्मीर में सेनाध्यक्ष का बराबर दोरा हो रहा है। वह सुरक्षा के स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। सैन्य अधिकारियों के साथ कई दर्जन बैठकें कर चुके हैं। नियंत्रण रेखा पर सेना और सीमा सुरक्षा बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है, फिर भी हमला हुआ।

-बार-बार सेना के बेस शिविर क्यों निशाने पर आ रहे हैं। सेना आखिर अपने शिविरों की सुरक्षा कर पाने में क्यों सफल नहीं हो पा रही है?



 
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क्या होगा अब

Uri Attack: Last salute to the martyrs in tears, Family & People burst into tears - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो


-सैन्य शिविरों की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दिया जा सकता है।
-सुरक्षा इंतजाम के क्रम में इलेक्ट्रानिक उपरणों समेत अन्य निगरानी तंत्रों की भूमिका बढ़ सकती है।
-सैन्य परिसरों की सुरक्षा के लिए नए अफगानिस्तान या अमेरिका में अपनाए जा रहे मॉडल की तर्ज पर स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर में बदलाव किया जा सकता है।
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