सरकार ने इस वित्त वर्ष में शत्रु संपत्ति से 11 हजार 300 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। सरकार ने शेयरों की बिक्री और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) में पुनर्खरीद से ये राशि हासिल की है। वहीं सरकार को इस चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 85 हजार करोड़ रुपये जुटाने में मदद मिली है। जो किसी भी वित्त वर्ष में अब तक के विनिवेश का दूसरा बड़ा आंकड़ा है।
इससे पहले नवंबर 2018 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को कंपनियों के शत्रु शेयर बेचने की अनुमति दी थी। इन शत्रु शेयरों को बेचकर सरकार ने 700 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके साथ ही सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की पुनर्खरीद से 10,600 करोड़ रुपये से अधिक हासिल किए।
बंटवारे के दौरान देश छोड़ कर गए लोगों की संपत्ति सहित, 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने इन देशों के नागरिकों की संपत्तियों को सीज कर लिया था। इन्हीं संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में लगातार दूसरे साल विनिवेश लक्ष्य से अधिक राशि जुटाई है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा था। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार ने 72,500 करोड़ रुपये के लक्ष्य की तुलना में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपये अधिक हासिल किए थे।
सरकार को कंपनियों की हिस्सेदारी से भी काफी लाभ मिला है। सरकार को कोल इंडिया की बिक्री पेशकश (ओएफएस) से 5,218 करोड़ रुपये और एक्सिस बैंक में एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी बेचने से 5,379 करोड़ रुपये मिले हैं।