अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पीठ को हर-हमेशा सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए। अदालत को दूसरे सेक्टर में हो रहे विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। यह कहना सही नहीं है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। हर चीज नगेटिव नहीं है। जवाब में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने अटॉर्नी जनरल से कहा, %मैं आपको एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम सरकार की आलोचना नहीं करते। हम भी देश केनागरिक हैं और हमें भी देश की समस्याओं केबारे में पता है।
हम सिर्फ लोगों का अधिकार सुनिश्चित करना चाहते हैं। हम अनुच्छेद-21 को अमल करना चाहते हैं। कई चीजों तो हमारे आदेशों की बदौलत ही होते हैं। हम सिर्फ चाहते हैं कि संसद द्वारा बनाए गए कानून का पालन हो।’ जस्टिस लोकुर ने यह भी कहा कि उपकर केजरिए सरकार ने 100000 करोड़ जमा किए हैं लेकिन इस रकम पर बैठी हुई है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आज के जमाने में यह रकम कुछ भी नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार को यह रकम नहीं खर्च करनी है।
रकम राज्यों को खर्च करनी है और इसकेलिए राज्यों को लेकर लगातार संवाद किया जाता है। इस पर पीठ ने कहा कि फिर भी यह रकम उतनी जरूर है कि शेल्टर होम की स्थिति ठीक हो सकती है, विधवाओं का पुनर्वास हो सकता है और जेलों को बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तव में अटॉर्नी जनरल जेलों में कैदियों की भरमार और उनकी दयनीय स्थिति से संबंधित एक मामले में पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जेल-सुधार को लेकर एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी की सहायता केलिए दो सरकारी अधिकारी भी होंगे। कमेटी समय-समय पर अदालत को रिपोर्ट सौपेगी।