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किसानों और नेताओं की परेशानी नहीं बनेगा 'सांड़': ये तरीका बना गेम चेंजर, 90 फीसदी पैदा होंगी केवल 'बछिया'

सार

राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधारण कार्यक्रम के कार्यान्यवन के तहत 3.50 करोड़ पशुओं को कवर किया जा चुका है। इसके अलावा 4.33 करोड़ कृत्रिम गर्भाधारण किए गए हैं। इससे 2.28 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं। सरकार ने आईवीएफ तकनीक का उपयोग करते हुए त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों में दो लाख आईवीएफ गर्भधारण कराए जाएंगे...
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छुट्टा गोवंश - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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छुट्टा गोवंश, जो किसानों और नेताओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, अब उससे छुटकारा मिल जाएगा। किसानों की फसलें बर्बाद नहीं होंगी और दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष को निशाने पर रखने वाला विपक्ष भी शांत हो जाएगा। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत जो योजना बनाई है, उसके नतीजे आने लगे हैं। 'सेक्स सॉर्टेड सीमन', गेम चेंजर बन गया है। देश में अब 90 फीसदी सटीकता के साथ केवल बछिया पैदा होंगी। 'सेक्स सॉर्टेड सीमन' का उपयोग न केवल दूध उत्पादन को बढ़ाने में, बल्कि आवारा पशुओं की आबादी को सीमित करने में भी गेम चेंजर साबित होगा। अभी तक 44.37 लाख सीमन खुराकों का उत्पादन किया जा चुका है। त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम के जरिए 51 लाख कृत्रिम गर्भधारण करवाए जाएंगे। सुनिश्चित गर्भावस्था पर 750 रुपये या सॉर्टेड सीमन की लागत के 50 फीसदी तक की सब्सिडी किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।

देसी बोवाइन नस्लों का विकास

सांड़ एवं आवारा पशु, खासतौर से उत्तर भारत के कई राज्यों में परेशानी का सबब बने हुए हैं। किसानों को शिकायत थी कि उन्हें दिन-रात खेतों में रहना पड़ता है। इसके बावजूद दर्जनों आवारा पशु आते हैं और उनकी फसल को तहस-नहस कर जाते हैं। पशुओं से खेतों की रखवाली के चलते किसानों को अपने घर गए हुए कई दिन हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में खासतौर पर, 'कांग्रेस' और 'सपा' ने इस मुद्दे को जमकर भुनाने का प्रयास किया था। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रूपाला के अनुसार, पशुपालन और डेयरी विभाग, देसी बोवाइन नस्लों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। बोवाइन आबादी के आनुवांशिक उन्नयन और बोवाइनों के दुग्ध उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन को लागू किया जा रहा है। प्रजनन नेटवर्क को सुदृढ़ करने और किसानों के द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के वितरण के माध्यम से गर्भाधारण कवरेज को बढ़ावा दिया जाएगा।

3.50 करोड़ पशु कवर

राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधारण कार्यक्रम के कार्यान्यवन के तहत 3.50 करोड़ पशुओं को कवर किया जा चुका है। इसके अलावा 4.33 करोड़ कृत्रिम गर्भाधारण किए गए हैं। इससे 2.28 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं। सरकार ने आईवीएफ तकनीक का उपयोग करते हुए त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों में दो लाख आईवीएफ गर्भधारण कराए जाएंगे। किसानों को प्रति सुनिश्चित गर्भधारण पर पांच हजार रुपये की दर से सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। सीमन स्टेशनों पर उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता वाले सांडों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए देश में 13 संतति परीक्षण और सात नस्ल चयन कार्यक्रम लागू किए गए हैं।

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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रूपाला ने बताया, देशी नस्लों के वैज्ञानिक और समग्र तरीके से विकास एवं संरक्षण के लिए 16 गोकुल ग्राम व दो राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र, स्थापित किए गए हैं। अभी तक आंध्रप्रदेश में 1, तेलंगाना में 1, कर्नाटक में 1, गुजरात में 1, मध्य प्रदेश में 1, महाराष्ट्र में 2, पंजाब में 1, हरियाणा में 1, हिमाचल प्रदेश में 1, उत्तर प्रदेश में 3, अरुणाचल प्रदेश में 1, छत्तीसगढ़ में 1 और बिहार में एक गोकुल ग्राम स्थापित किया गया है।

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