असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) की सूची पर जारी विवाद के बीच बृहस्पतिवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सरकार का इरादा किसी को असम से भगाने का नहीं है। जिनका नाम सूची में शामिल नहीं है, उन्हें ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील करने का अधिकार है। इस मुद्दे पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ।
टीएमसी के सदस्यों ने सरकार पर एनआरसी के बहाने असम से बंगालियों को भगाने की साजिश रचने का आरोप लगाया। गौरतलब है कि एनआरसी की सूची में 1.9 करोड़ लोगों के नाम हैं। शेष 1.39 करोड़ लोगों के नाम शामिल नहीं होने से राज्य में सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
शून्यकाल में टीएमसी के सौगत राय ने इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि एनआरसी में जिन 1.39 करोड़ लोगों को जगह नहीं दी गई है उनमें बांग्ला बोलने वाले लोग शामिल हैं। साजिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें दो सांसदों के नाम भी शामिल नहीं किए गए हैं। राय ने एनआरसी के बहाने असम से बांग्लाभाषियों को भगाने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
हंगामे के बाद गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है। जिनका नाम छूट गया है उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके पास ट्रिब्यूनल में अपील करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा राज्य से किसी को भगाने का नहीं है।