मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के महज दो सत्र में सरकार ने दो अहम सियासी मोर्चे पर फतह हासिल की। पहले सत्र में अनुच्छेद 370 निरस्त कर सबको चौंकाया तो शुक्रवार को खत्म हुए शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन कानून को अमली जामा पहना कर दूसरा हिंदूवादी एजेंडा पूरा करने मे सफलता हासिल की।
सरकार ने दोनों अहम एजेंडों को उच्च सदन में अपने दम पर बहुमत से दूर रहने के बावजूद अंजाम तक पहुंचाया।
बीते बजट सत्र की तरह शीत सत्र भी मोदी सरकार के लिए बेहद सफल रहा। इस दौरान लोकसभा में 14 तो राज्यसभा में 15 बिलों पर सहमति की मुहर लगी। इनमें से कई बिल लगातार चर्चा का विषय बने। मसलन दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सरकार अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का सफल दांव भी चलने में कामयाब रही।
इसके अलावा संसद और विधानसभाओं में एससी-एसटी प्रतिनिधित्व आरक्षण को दस साल आगे बढ़ाने के साथ इनमें एंग्लो इंडियन कोटे को खत्म करने में भी सरकार कामयाब रही।
फिर सरकार एसपीजी एक्ट में संशोधन कर एसपीजी की सुरक्षा पीएम तक ही सीमित रखने संबंधी कानून भी बनाने में कामयाब रही। लोकसभा की उत्पादकता 115 तो राज्यसभा की उत्पादकता सौ फीसदी रही।