लापता 39 भारतीयों में से एक ही बहन गुरपिंदर
इराक के मोसुल शहर में तीन साल पहले जो 39 भारतीय लापता हुए थे सरकार ने उनके परिवारवालों से अपने डीएनए सेंपल देने को कहा है, लेकिन इसके पीछे की वजह उनको नहीं बताई गई है। वे 39 भारतीय आतंकी संगठन आईएस के कब्जे के बाद (2014) से मोसुल से लापता हैं। लापता लोगों में से ज्यादातर पंजाब के गांव वाले इलाकों के हैं और उनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।
अब जब मोसुल को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से आजाद करवा लिया गया है तो परिवारवालों में अपने लोगों के लौट के आने की उम्मीद जग गई है, लेकिन अब डीएनए सेंपल मांगे जाने से वे हैरान हैं।
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बता दें कि इराक के विदेश मंत्री इब्राहिम अल जाफरी जब जुलाई में भारत दौरे पर आए थे तो उन्होंने साफ कह दिया था कि उन 39 भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे जिंदा हैं भी या नहीं।
पंजाब का एक शख्स (हरजीत) जो जून 2014 में आईएस के चंगुल से भागकर भारत आया था उसने भी दावा किया था कि सभी 39 भारतीयों को मार दिया गया है। वहीं सुषमा स्वराज परिवारवालों को वक्त-वक्त पर भरोसा देती रही हैं कि सरकार उनको ढूंढने की पूरी कोशिश कर रही है।