कोविड नेशनल टास्कफोर्स, आईसीएमआर के चेयरमैन डा. एनके अरोड़ा का कहना है कि पिछले साल मार्च महीने तक हमारे पास बहुत कम संख्या में वेंटिलेटर थे। अब इसमें कई गुना बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन्हें चलाना कैसे होगा। आईसीयू और गहन चिकित्सा कक्ष में सभी को तो नहीं लगाया जा सकता। एसजीपीजीआई, लखनऊ के पल्मोनरी विभाग के शिक्षक का भी कहना है कि उत्तर प्रदेश में तकनीकी विशेषज्ञों और चिकित्सकों की भारी कमी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोविड संक्रमण की समीक्षा कर रहे थे, गांव में फैल रहे संक्रमण और उसकी रोकथाम को लेकर काफी चिंतित थे, पर उनकी यह चिंता तब और बढ़ गई जब उनके सामने राज्यों के जिला चिकित्सालयों के बारे में जानकारी रखी गई।
केन्द्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि मार्च 2020 तक देश में निजी और प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर कुल 40-45 हजार वेंटिलेटर ही थे। अब इनकी संख्या धीरे-धीरे 80-85 हजार पहुंचने जा रही है। लेकिन इतनी संख्या में इसे समझने, ऑपरेट करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ और चिकित्सक नहीं है। बताते हैं कि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत सभी राज्यों का यही हाल है। यहां तक कि दिल्ली में भी विशेषज्ञों की कमी है।
वैशाली मैक्स के गहन चिकित्सा कक्ष में सेवा देने वाले डा. अश्विन चौबे का कहना है कि आईसीयू या वेंटिलेटर को ऑपरेट करना कोई राकेट साइंस भी नहीं है, लेकिन निजी अस्पतालों में भी इसके विशेषज्ञों की कमी रहती है। डा. अश्विन बताते हैं कि गहन चिकित्सा कक्ष में कार्य करने वाले चिकित्सकों को कई स्तरों पर सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। यह थोड़ा तकनीकी भी है।
'वह तो सरकार हैं कुछ भी कह सकते हैं'
बीएचयू के वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि वह प्रधानमंत्री के निर्देश पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। वह प्रधानमंत्री हैं, कुछ भी कह सकते हैं। जबकि जमीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। जहां अभी हम लोगों को सामान्य ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे हैं, वहां वेंटिलेटर बेड्स की सुविधा अचानक बढ़ाना बहुत आसान नहीं है।