निर्वाचन आयोग ने गुजरात और हिमाचल में होने वाले चुनाव में ईवीएम को वोटर वेरिफियएबल पेपर ऑडिट ट्रायल सिस्टम (वीवीपीएटी) मशीन से लिंक करने का फैसला किया है। दरअसल, गुजरात और हिमाचल में इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं। ईसी के सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय कुछ समय पहले लिया गया था। साथ ही नए मशीनों के लिए आदेश दिया गया था।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि वीवीपीएटी मशीन ईवीएम का इस्तेमाल करते हुए वोट का प्रिंटआउट बनाती है। प्रिंटआउट को एक बॉक्स में जमा किया जाता है और चुनाव के बारे में किसी भी विवाद को हल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि "इन दो राज्यों में चुनाव के लिए हमें अधिक से अधिक 80,000 वीवीपीएटी मशीनों की आवश्यकता होगी। लेकिन हमारे पास पहले से 55,500 है और बांकी को बनाने के लिए दो कंपनियों को आदेश दिया गया है। सभी राजनीतिक दलों की मांग है कि भविष्य में होने वाले 100 फीसदी चुनाव वीवीएपीएटी मशीन से जुड़े ईवीएम के साथ हों। इसके लिए सरकार ने बुधवार को वीवीपीएटी मशीन खरीदने के लिए 3,174 करोड़ रुपये का प्रदान किया है।
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद बीजेपी पर विपक्षी दलों ने ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए थे, साथ ही आगामी चुनावों में वोटर वेरिफियएबल पेपर ऑडिट ट्रायल सिस्टम यानी वीवीपीएटी के इस्तेमाल की मांग की थी। हालांकि ईसी के सूत्रों ने कहा है कि 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों के भी चुनाव होने हैं जिसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, सिक्किम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा शामिल हैं। 2019 में होने वाले चुनाव को लेकर लगभग 16,15,066 वीवीपीएटी मशीनों की आवश्यकता होगी।
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इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने पिछले साल केन्द्र सरकार को एक पत्र के माध्यम इसकी जानकारी दी थी। इसके लिए जैदी ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) के उत्पादन पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि ये दोनों कंपनियों ने समय पर ईवीएम और वीवीपीएटी मशीन को नहीं दिया।
बहरहाल, ईसी ने दोनो कंपनियों से कहा कि वह अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाए साथ ही 2019 लोकसभा चुनाव से पहले वीवीपीएटी मशीन मुहैया कराए।