विपक्ष के हल्की-फुल्की आपत्तियों के बीच सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी से जुडे़ चार बिलों को संसद में पेश कर दिया। लोकसभा में इस बिल पर 29 मार्च को चर्चा शुरू होगी। जीएसटी पर एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरकार का प्रयास गुरूवार तक बिल को संसद से पारित करवाने की है। ताकि 1 जुलाई की तय समय सीमा के बीच जीएसटी लागू कर सके।
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वित्त मंत्री अरूण जेटली ने देश के सबसे बडे़ आर्थिक सुधार के रूप में माने जा रहे जीएसटी से जुडे़ चार सहायक विधेयक सी-जीएसटी, आई-जीएसटी, यूटी-जीएसटी और मुआवजा बिल को लोकसभा में पेश कर दिया है। हालांकि सोमवार को जेटली जब जीएसटी से जुडे बिलों को लोकसभा में पेश कर रहे थे तब विपक्ष के कुछ सांसदों ने नियमों के अभाव का हवाला देते हुए बिल पेश करने पर आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से हस्तक्षेप करते हुए जेटली को बिल पेश करने की मंजूरी प्रदान की।
लोकसभा में जीएसटी से जुडे़ पेश करते वक्त कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और तृणमूल सांसद सौगत राय ने बिल पेश किए जाते वक्त संसदीय नियमों का हवाला देकर आपत्ति जताई। सौगत और वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि उनका बिल को लेकर विरोध नहीं है। मगर जिस तरीके से आनन-फानन में नियमों की अनदेखी कर बिल पेश किया जा रहा है उसका विरोध है।
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सौगत ने कहा कि चूंकि बिल पेश किए जाने का मामला कार्यसूची में शामिल नहीं है इसलिए इसे एक-दो दिन के बाद पेश किया जाना चाहिए। ताकि सदस्य बिल का सही ढंग से अध्ययन कर सकें। मगर सरकार की ओर से संसदीय कार्यराज्य मंत्री एस एस अहलूवालिया ने विपक्ष के आपत्तियों का जवाब दिया। उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी विपक्ष के सांसदों को भी समझाया कि वे बिल पेश होने दें। विपक्ष की आपत्ति खारिज होने के बाद जेटली ने लोकसभा में पेश किया।
जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब का प्रस्ताव
सरकार का प्रयास जीएसटी को एक जुलाई से लागू करने का है। जीएसटी लागू होने के बार उत्पाद, सेवा कर, वैट और अन्य स्थानीय शुल्क इसमें समाहित हो जाएंगे। दरअसल जीएसटी से जुड़े बिलों को केंद्र सरकार इसलिए जल्द से जल्द लोकसभा से पारित करवा लेना चाहती है ताकि बिलों को राज्यसभा में ले जाने तथा वहां से मिले सुझावों को फिर लोकसभा में पेश करने के लिए उसे पर्याप्त समय मिल सके। ये सभी बिल धन- विधेयक हैं, इसलिए राज्यसभा में इसकी राह नहीं रूक सकती है। धन विधेयकों में उच्च सदन के सुझाव लोकसभा के लिए बाध्यकारी नहीं हैं। लोकसभा उन्हें मंज़ूर भी कर सकती है, और खारिज भी। हालांकि सरकार का प्रयास सर्वसम्मति से सभी बिलों को संसद से पारित करवाने का है।
जीएसटी के तहत सरकार ने चार टैक्स स्लैब का प्रस्ताव रखा है। जिसमें 5, 12, 18 व 28 प्रतिशत के टैक्स स्लैब हैं। इसके अलावा पहले पांच साल तक कारों, शीतल पेयों तथा तंबाकू उत्पादों जैसी सामग्रियों पर कुछ अन्य कर भी लगाए जाएंगे, ताकि राज्यों के नुकसान की भरपाई की जा सके। तो मुआवज़ा कानून इस लिहाज़ से तैयार किया गया है, ताकि जीएसटी के लागू होने पर राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादे को संवैधानिक जामा पहनाया जा सके।
जीएसटी में क्या हो सकता है सस्ता
बताया जा रहा है कि इसके लागू होने से एयर कंडीशनर, माइक्र्तोवेव ओवन, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन जैसे उपभोक्ता सामग्री सस्ते होंगे। अभी इन सामानों पर 12 फीसदी से भी ज्यादा केंद्रीय उत्पाद शुल्क और 12 से 14 फीसदी तक वैट वसूले जाते हैं। जैसा कि अभी कहा जा रहा है कि जीएसटी की अधिकतम दर 18 फीसदी होगी, तो ऐसी स्थिति में ये सामान सस्ते हो जाएंगे। इसी तरह वातानुकूलित रेस्तरां में खाना पीना भी सस्ता होगा क्योंकि अभी इस पर वैट और सर्विस टैक्स दोनों लगता है। बाद में सिर्फ एक टैक्स लगेगा। माल ढुलाई भी सस्ती होगी। मिनी एसयूवी भी सस्ती होगी क्योंकि अभी इस पर 30 से 40 फीसदी तक टैक्स लगता है। यह घट कर 18 फीसदी रह जाएगा।
सभी सेवाएं महंगी हो जाएंगी क्योंकि अभी सेवा कर और सेस के मद में 15 फीसदी कर लगता है। यह जीएसटी में बढ़ कर 18 फीसदी हो जाएगी। चाय-काफी एवं कुछ डिब्बाबंद उत्पाद, जिस पर अभी टैक्स नहीं लगता है या बेहद कम टैक्स लगता हैए उस पर टैक्स की दर बढ़ कर 18 फीसदी हो जाएगी। रेडिमेड गार्मेंट के भी महंगे होने के आसार हैं क्योंकि अभी राज्यों में इस पर कम वैट है। हालांकि अभी कई चीजों पर स्पष्टता नहीं है जैसे कि खाद्यान्न, खास कर ब्रांडेड खाद्यान्न पर क्या होगा। खाद्यान्नों की खुली बिक्र्ती पर अभी टैक्स नहीं है लेकिन उसमें वैल्यू एडिशन के बाद टैक्स लगता है।