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Gaurav Ballav: आलाकमान और कार्यकर्ताओं के बीच कौन 'कांग्रेसी नेता' बन रहा रोड़ा? गौरव वल्लभ ने किया बड़ा इशारा

सार

कांग्रेस के प्रवक्ता रहे गौरव वल्लभ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने के पीछे कई कारण बताए। लेकिन इन कारणों में एक प्रमुख कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं के बीच बातचीत की कमी और सीधे तौर पर संपर्क न होने का आरोप लगाया।
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भाजपा नेता गौरव वल्लभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस में आखिर वह कौन नेता हैं, जो सामान्य कार्यकर्ता और कांग्रेस आलाकमान के बीच रोड़ा बन रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता और पार्टी के नेता रहे गौरव वल्लभ ने अपने इस्तीफे में कुछ इस तरह का इशारा करके कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है। दरसअसल गौरव वल्लभ ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी पाटना बहुत मुश्किल है। बड़े नेताओं को सीधा सुझाव तक नहीं दिया जा सकता। दरअसल कांग्रेस में इससे पहले भी दबी जुबान से लेकर खुले तौर पर भी आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाने या सुझाव देने को लेकर ऐसे ही सवाल उठाए हैं। फिलहाल गौरव वल्लभ के इस्तीफे के साथ अब चर्चा इसी बात की हो रही है कि आखिर कांग्रेस में कार्यकर्ताओं और आलाकमान के बीच कौन आड़े आ रहा है? 

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गुरुवार को कांग्रेस के प्रवक्ता रहे गौरव वल्लभ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने के पीछे कई कारण बताए। लेकिन इन कारणों में एक प्रमुख कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं के बीच बातचीत की कमी और सीधे तौर पर संपर्क न होने का आरोप लगाया। गौरव वल्लभ ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी में बड़े नेताओं और जमीनी कार्यकताओं के बीच दूरियां बढ़ गईं हैं, जिसे खत्म करना अब बेहद कठिन लगता है। वल्लभ आगे भी पार्टी पर हमलावर होते हुए कहते हैं कि बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए। अगर एक कार्यकर्ता अपने नेता को सीधे तौर पर सुझाव नहीं दे सकता, तो पार्टी के भीतर किसी भी तरह का सकारात्मक परिवर्तन नहीं हो सकता। उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच में संवादहीनता का आरोप लगाया है।

पार्टी आलाकमान और सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद नहीं
गौरव वल्लभ के इस्तीफे की इस लाइन को लेकर सियासी गलियारों के अलावा पार्टी के भीतर कई तरह के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के भीतर नाराज नेताओं के एक धड़े से ताल्लुक रखने वाले और अब पार्टी से अलग हो चुके एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि यह बात सच है कि पार्टी आलाकमान और सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद नहीं हो पा रहा है। इससे पहले भी कई नेता इसी तरह के आरोप लगाकर पार्टी से अलग हो चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि पार्टी के भीतर इस बात की चर्चा नहीं होती है। लेकिन खुलकर कोई भी नेता इस पर बात नहीं रखता है। उन्होंने बगैर नाम लिए कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं, जो अपना दायरा गांधी परिवार के इर्दगिर्द रखना चाहते हैं, जिससे पार्टी के कार्यकर्ता और कई नेता अपनी बात भी उन तक नहीं पहुंचा सकते हैं।
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पार्टी ने गौरव वल्लभ को दी थीं बड़ी जिम्मेदारियां
हालांकि कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं कि जब कोई पार्टी छोड़कर जाता है, तो इस तरीके के तमाम आरोप लगते हैं, जिसका कोई औचित्य नहीं होता है। अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं कि जब पार्टी ने गौरव वल्लभ को बड़ी जिम्मेदारियां देते हुए चुनावी मैदान में उतारा, तो क्या वह बड़े नेताओं से दूर थे। अब जब वह पार्टी छोड़कर अपने फायदे के लिए भाजपा में शामिल हो रहे हैं, तो अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि यह बात अब लोगों को पता चल चुकी है कि गौरव वल्लभ ने भाजपा ज्वाइन करने के लिए ही पार्टी से इस्तीफा दिया। इसलिए उनकी बातों में किसी प्रकार के न तो तथ्य हैं, और न ही इस बात में दम है कि कांग्रेस कार्यकर्ता और आलाकमान के बीच में दूरी है। उनका कहना है कि सुझाव देने के लिए बड़ी पार्टी में कई तरह के चैनल और व्यवस्थाएं होती हैं, जिससे सामान्य कार्यकर्ताओं के सुझाव भी बड़े नेताओं तक पहुंचते हैं।  

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