राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) एकाधिकार के दुरुपयोग के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की दलील से सहमत रहा कि गूगल एकाधिकार का उपयोग ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन की कमाई में करता है।
सीसीआई ने दावा सुनवाई के दौरान दावा किया था कि जो सुधार करने को कहा गया है, वैसा करें तो लंबे समय तक बाजार को एकाधिकार मुक्त रखा जा सकेगा। वहीं, एनसीएलटी ने कंपनी को आंशिक राहत भी दी है। सीसीआई ने गूगल को अपने प्ले स्टोर पर थर्ड पार्टी एप स्टोर बनाने को कहा था। इस पर एनसीएलएटी ने उसे राहत दी है। वहीं, ‘साइडलोडिंग’ यानी एंड्रॉयड फोन पर एप स्टोर के बाहर से एप इंस्टॉल करने से भी गूगल रोक सकेगा। सीसीआई ने उसे ऐसी रोक न लगाने को कहा था। यूजर्स को एंड्रॉयड फोन में पहले से इंस्टाल सॉफ्टवेयर अनइंस्टाल करने का विकल्प गूगल को अब नहीं देना होगा, जैसा सीसीआई चाहता था। इनमें गूगल मैप, जी-मेल, यू-ट्यूब जैसे एप शामिल हैं। सीसीआई ने किसी भी डिवाइस से गूगल सूट सॉफ्टवेयर अनइंस्टॉल करने देने के निर्देश दिए थे, जिसे अधिकरण ने लागू नहीं किया।
गूगल ने कहा, हम निर्णय का विश्लेषण कर रहे
गूगल ने बयान दिया कि वह अधिकरण के निर्णय का विश्लेषण कर रहा है। इसी के आधार पर वह आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।
यह 6 निर्देश बरकरार रखे
1. यूजर्स को अपने डिवाइस के शुरुआती सेटअप के दौरान अपनी पसंद का सर्च इंजन प्राथमिकता पर रखने विकल्प मिलेगा।
2. मोबाइल फोन बना रही वास्तविक उपकरण विनिर्माता कंपनियों (ओईएम) पर दबाव डाल कर गूगल अपने एप को सामूहिक रूप से पहले से इंस्टॉल नहीं करवा सकता।
3. फोन में प्ले स्टोर उपयोग करने का लाइसेंस कंपनियों को इस आधार पर नहीं दिया जाएगा कि कंपनियां पहले फोन में गूगल के विभिन्न एप इंस्टॉल करे।
4. केवल अपनी सर्च सेवाओं को मोबाइल फोन में शामिल करने के लिए ओईएम को विशेष फायदे नहीं देगा।
5. कंपनियों पर एंटी फ्रेगमेंटेशन ऑब्लिगेशन नहीं लादेगा। यानी अपने एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम का लाइसेंस देने के बदले में फोन बना रही कंपनियों से ऐसे अनुबंध नहीं करेगा, जिनमें कहा जाए कि वे दूसरे या प्रतियोगी ऑपरेटिंग सिस्टम न विकसित करेंगी, न बेचेंगी।
6. एंड्रॉइड फोर्क के आधार पर बने फोन न बेचने पर गूगल फोन कंपनियों को फायदा नहीं देगा। फोर्क यानी सोर्स कोड को कॉपी कर डवलपर द्वारा अपना प्रोग्राम, एप्लीकेशन या ओएस बनाना।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक दिया था वक्त
सीसीआई के आदेश के खिलाफ गूगल ने अपीलीय फोरम एनसीएलएटी में अपील की। उसे 4 जनवरी को अधिकरण की एक अन्य पीठ ने जुर्माने का 10 प्रतिशत चुकाने को कहा, आदेश पर अंतरिम रोक नहीं लगी। इसके खिलाफ गूगल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां से मिले निर्देश के तहत अधिकरण ने 15 फरवरी से सुनवाई शुरू की थी। उसे 31 मार्च तक निर्णय लेने को कहा गया था।
कमाई की गणना भी सही मानी
अधिकरण ने कहा कि सीसीआई ने गूगल पर जुर्माना लगाने के लिए उसकी कमाई के सभी स्रोतों से सही गणना की है। गूगल का दावा था कि सीसीआई ने नॉन-माडा (गैर-मोबाइल एप वितरण अनुबंध) आधारित उपकरणों को भी गणना में शामिल किया। जवाब में कहा गया कि गूगल की कमाई किसी एक एप से नहीं होती। बल्कि गूगल सर्च व यूट्यूब से लेकर मैप्स, क्लाउड, प्लेस्टोर, जी-मेल आदि एप से भी उसके यूजर्स बढ़ते हैं, और सभी के मिले-जुले उपयोग से राजस्व भी बढ़ता है।