कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल को हर जगह 'अच्छे नतीजे' मिले और बहुत उच्च स्तर की बैठकें हुईं। साथ ही भारत की स्थिति को पूरी तरह से समझा गया। थरूर अमेरिका और चार अन्य देशों की यात्रा पर गए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।
पांच देशों की यात्रा के बाद देश लौटे थरूर ने कहा कि सरकार के नजरिए से सांसदों को भेजने का मकसद यह दिखाना था कि भारत राजनीतिक रूप से एकजुट है और साथ ही यह संदेश विदेश में सरकारी अधिकारियों, सांसदों, थिंक टैंक, विचार निर्माताओं, मीडिया और प्रवासी भारतीयों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए। यह सब कुछ बहुत अच्छी तरह से पूरा किया गया।
ये भी पढ़ें: Samwad 2025: 'हमने उनका धर्म पूछकर नहीं, उनका कर्म देखकर मारा..', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले राजनाथ सिंह
हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, मुझे लगता है कि यह एक बहुत अच्छी यात्रा थी। हम सभी बहुत खुश हैं कि जिन पांच देशों में हम गए, वहां हमें कैसे स्वागत मिला। हमें हर जगह अच्छे नतीजे मिले। हमारी बहुत उच्च स्तर की बैठकें हुईं -राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उप-राष्ट्रपति, बहुत वरिष्ठ लोगों से हमारी बात हुई। साथ ही, इस बात की पूरी तरह समझाया या कि यह पूरी स्थिति आखिर क्यों शुरू हुई, खासकर पहलगाम के बाद और हमें कैसी प्रतिक्रिया देनी पड़ी।
कांग्रेस नेता ने कहा, वास्तव में जिन लोगों से हमने बात की, उन्होंने खास तौर पर हमारी संयमित प्रतिक्रिया की सराहना की। मैं कहूंगा कि हम इस पूरे मामले से बहुत अच्छे तरीके से निकले हैं। हमें जो जिम्मेदारी दी गई थी, वह हमने पूरी कर दी। थरूर ने कहा कि अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि पाकिस्तान के पास अब कोई ठोस बात बची ही नहीं है।
ये भी पढ़ें: Operation Sindoor Outreach: थोड़ी देर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे PM, लोक कल्याण मार्ग पहुंचे सदस्य
उन्होंने कहा, न सिर्फ सभी ने हमारी बात को समझा और स्वीकार किया गया, बल्कि अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रियाएं भी हमारे पक्ष में थीं... पाकिस्तान की स्थिति बहुत कमजोर है। वह कहता है कि उसने कुछ नहीं किया और भारत ने बिना किसी उकसावे के हमला किया, लेकिन कोई भी उसकी बात मानने को तैयार नहीं है। फिर वह खुद को उन्हीं आतंकवादियों का पीड़ित बताने की कोशिश करता है। मैंने उन्हें कहा, अगर आप अपने घर में सांप पालेंगे तो यह उम्मीद मत कीजिए कि वह केवल आपके दुश्मनों को डसेंगे। यही संदेश मैंने सभी को दिया।
कई देशों के दौरे के अंतिम चरण में इस प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका दौरा किया। इस दौरे का मकसद ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की स्थिति को दुनिया के महत्वपूर्ण लोगों के सामने रखना था। यह अभियान 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आंतकी हमे के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी।
भारत सरकार ने 33 देशों की राजधानियों के लिए सात सर्वदलीय प्रनिधिमंडल नियुक्त किए थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान का आतंकवाद के साथ संबंध उजागर किया जा सके। थरूर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल तीन जून को वॉशिंगटन पहुंचा और तीन दिनों तक कैपिटल हिल और वॉशिंगटन में कई बैठकें कीं। इसमें अमेरिकी सरकारी अधिकारियों और सांसदों को सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख की जानकारी दी गई।
ये भी पढ़ें: चीफ जस्टिस गवाई बोले- तकनीक दोधारी तलवार, न्यायिक कामकाज लिए हो इस्तेमाल, फैसले लेने के लिए नहीं
इससे पहले प्रतिनिधिमंडल गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा कर चुका था और इसके बाद अमेरिका में अपनी यात्रा का अंतिम चरण पूरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में थरूर के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सरफराज अहमद, टीडीपी के गंति हरीश मधुर बालयोगी, भाजपा के शशांक मणि त्रिपाठी, भाजपा के भुवनेश्वर कलिता, शिवसेना के मिलिंद देवड़ा, भाजपा के तेजस्वी सूर्या और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरणजीत संधू शामिल थे।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तब बढ़ गया, जब पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। इसके बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचों पर सटीक हमले किए। भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के सैन्य महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच 10 मई को बातचीत हुई, जिससे संघर्षविराम पर सहमति बनी।