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Climate Change: जलवायु परिवर्तन को लेकर राहत भरी खबर; ओजोन परत में सुधार, पूर्ण बहाली की ओर अग्रसर

Tue, 17 Sep 2024 01:52 PM IST
अभिषेक दीक्षित यूएन हिंदी समाचार

सार

यूएन एजेंसी ने बताया कि ओजोन की परत में सुधार, 1980 के स्तर तक पहुंच सकता है, जब उसमें कोई छेद नहीं उभरा था, मगर इसके लिए मौजूदा नीतियों को जारी रखना होगा। अंटार्कटिक क्षेत्र में इसके लिए 2066 तक का समय लग सकता है। आर्कटिक क्षेत्र में ओजोन परत में पूर्ण सुधार 2045 तक और शेष दुनिया तक 2040 तक होने की सम्भावना है।
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WMO - फोटो : UN
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विस्तार
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पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाने के लिए अहम ओजोन परत में निरंतर सुधार हो रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के एक नए अध्ययन में मजबूत तथ्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है। ओजोन परत एक रक्षा ऐसा कवच है जिसके जरिए हानिकारक अल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी) किरणों से पृथ्वी पर जीवन को  सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

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यूएन एजेंसी का वार्षिक ‘ओजोन व पराबैंगनी’ बुलेटिन को ‘विश्व ओजोन दिवस’ के अवसर पर जारी किया गया है, जिसे ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ और उसमें हुए संशोधन ‘किगाली समाझौता’ को लागू करने के सिलसिले में मनाया जाता है। इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों के परिणामस्वरूप ओजोन को गम्भीर नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उत्पादन पर रोकने में मदद मिली थी।

अतीत में किए गए अध्ययन में चेतावनी जारी की गई थी कि फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडिन समेत ऐसे अनेक रसायन हैं, जिनके इस्तेमाल से ओजोन परत को नुकसान पहुंच रहा है। विभिन्न उत्पादों के लिए तैयार किए जाने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन समेत अन्य रसायन व पदार्थ, ओजोन परत में छेद कर रहे थे, जिन्हें एयरोसोल्स, रेफ्रिजरेशन सिस्टम और वातावरण को ठंडा रखने के लिए चलने वाली मशीनों में भारी मात्रा में पाया जाता है। रिपोर्टों में कहा गया था कि ओजोन परत में छेद होने की वजह से सूरज से निकलने वाली ख़तरनाक़ अल्ट्रावायलेट किरणों का विकिरण, पृथ्वी तक पहुँचने लगा था।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ओज़ोन परत में हो रहे सुधार का स्वागत करते हुए कहा कि इन रक्षा उपायों को जारी रखा जाना होगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि प्रोटोकॉल का किगाली संशोधन, गर्माती जलवायु के लिए जिम्मेदार शक्तिशाली गैस हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) का इस्तेमाल चरणबद्ध ढंग से हटाने पर केंद्रित है। इस संशोधन से कार्बन उत्सर्जन में कटौती लाने, आम नागरिकों व पृथ्वी की रक्षा सुनिश्चित करने में योगदान दिया जा सकता है। जैसे-जैसे तापमान के रिकॉर्ड का ध्वस्त होना जारी है, इसी की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

यूएन एजेंसी ने बताया कि ओजोन की परत में सुधार, 1980 के स्तर तक पहुंच सकता है, जब उसमें कोई छेद नहीं उभरा था, मगर इसके लिए मौजूदा नीतियों को जारी रखना होगा। अंटार्कटिक क्षेत्र में इसके लिए 2066 तक का समय लग सकता है। आर्कटिक क्षेत्र में ओजोन परत में पूर्ण सुधार 2045 तक और शेष दुनिया तक 2040 तक होने की सम्भावना है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के बुलेटिन में मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की अल्ट्रावायलेट विकिरण से रक्षा करने के लिए रणनीतियों को साझा किया गया है। साथ ही, 2023 में अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन परत में छेद पर, मौसमी रुझानों और ज्वालामुखी फटने के असर का भी विश्लेषण किया गया है। बुलेटिन में अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन परत में आ रहे सकारात्मक बदलावों की बात कही गई है, मगर यह आशंका जताई गई है कि वातावरण में किसी भी घटना से ये प्रभावित हो सकते हैं। यूएन एजेंसी वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी ऐसे प्रभावों की वजह को पूर्ण रूप से समझा जाना है और इसके लिए ओजोन परत की निगरानी को जारी रखना होगा।
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(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

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