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Weather: किसानों के लिए अच्छी खबर, फसलों की न करें चिंता, गेहूं समेत इनकी भरपूर होगी पैदावार

Fri, 13 Dec 2024 06:51 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, दिल्ली से रिटा. चीफ टेक्निकल ऑफिसर डॉ. बीरपाल सिंह अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि, सरसों और गेहूं फसल को शीतलहर से कहीं न कहीं फायदा ही होता है। इससे इन फसलों की पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है।
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इस सीजन किसानों को होगा फायदा। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश के कई राज्यों में शीतलहर का प्रकोप शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में इसकी ओर बढ़ने की आशंका है। शीत लहर आम आदमी को जरुर परेशान करेगी, लेकिन किसानों के लिए यह राहत लेकर आएगी। क्योंकि बढ़ती सर्दी रबी सीजन की फसल के लिए फायदेमंद होती है। खासकर गेहूं की फसल के लिए। कृषि जानकारों का कहना है कि, बढ़ती सर्दी का सबसे ज्यादा फायदा गेहूं की फसल को मिलता है। ठंड,कोहरा और प्रदूषण से गेहूं की फसल पर कोई नुकसान नहीं होगा। क्योंकि अभी कई जगह बिजाई होनी है और जहां हुई है वहां अभी शुरुआती स्टेज है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में कोहरा पड़ता है और लगातार पड़ता है तो उसका फायदा गेहूं की फसल को होगा।
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दरअसल, ठंड और कोहरा गेहूं समेत कई फसलों के लिए अच्छा होता है। हालांकि इस दौरान इन सभी फसलों को थोड़ी देख रेख और सावधानी की जरूरत होती है। क्योंकि शीतलहर के दौरान फसलों में पाला पड़ने और कई रोग फैलने का खतरा रहता है। लेकिन गेहूं, अरहर, सरसों, चना, मटर, अलसी, गन्ना आदि पर शीतलहर का ज्यादा प्रभाव नहीं होता है। इन फसलों के लिए ठंड और शीतलहर को अच्छा माना जाता है। अगर शुरू में ये दोनों गेहूं की फसल को लगातार कई दिन मिल जाए तो, गेहूं की पैदावार अच्छी हो सकती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, दिल्ली से रिटा. चीफ टेक्निकल ऑफिसर डॉ. बीरपाल सिंह अमर उजाला से चर्चा में कहते है कि, सरसों और गेहूं फसल को शीतलहर से कहीं न कहीं फायदा ही होता है। इससे इन फसलों की पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है। लेकिन गेहूं को छोड़कर सरसों और अरहर समेत अन्य फसलों को लगातार कई दिनों तक चलने वाली शीतलहर से नुकसान हो सकता है।  
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लेकिन शीतलहर का सबसे ज्यादा बुरा असर फल और सब्जियों की फसल पर पड़ता है। ऐसे में इनका बचाव बेहद ही जरूरी होता है।  आलू, भिंडी, गोभी, बैंगन, मूली, टमाटर जैसी फसलों पर पाला पड़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा फलों में पपीता और केले की फसल को भी पाला लगने की संभावना रहती है। ऐसे में इनका शीतलहर से बचाव बेहद जरूरी होता है। जीरा, धनिया, सौंफ, अफीम आदि फसलों में भी पाला पड़ सकता है, जिससे भारी नुकसान की आशंका बनी रहती है। हालांकि इन फसलों को कई प्रकार के उपाय कर पाला से बचाया जा सकता है।  किसान सिंचाई, दवाओं के छिड़काव और फसलों को प्लास्टिक कवर, फूस की पुआल या जूट के हल्के बोरे आदि से ढक कर पाला से बचा सकते है। लेकिन, ढंकते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पौधों पर ज्यादा वजन न पड़ रहा हो।  ऐसा करने से मिट्टी का तापमान कम नहीं होता और नुकसान होने से बच जाता है।

अच्छी होगी गेहूं की फसल
अमर उजाला से चर्चा में कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि इस बार सरकार ने गेहूं उत्पादन लक्ष्य पिछली बार से भी ज्यादा रखा है। जो बहुत ही आराम से पूरा हो जाएगा। पिछले साल भी पहले ऐसे ही चर्चा हुई थी कि गेहूं उत्पादन कम होगा लेकिन गेहूं का अच्छा उत्पादन हुआ। इस बार भी मौसम भी अच्छा है। इसलिए गेहूं का उत्पादन अच्छा होगा। इस साल बारिश देर तक हुई है। मॉनसून काफी देर तक रहा है, जिसके चलते पानी का भराव अच्छा है, जहां सिंचाई को लेकर बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं होतीं, वहां पर पानी का भराव है। इसलिए गेहूं की सिंचाई के लिए पानी पर्याप्त है।
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