प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार यूरोपीय देशों की छह दिवसीय यात्रा के पहले पड़ाव पर सोमवार को जर्मनी पहुंचे। पीएम ने जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से उनके सरकारी गेस्ट हाउस ‘मेसेबर्ग पैलेस’ में मुलाकात की।
प्राइवेट डिनर के दौरान दोनों नेताओं में अनौपचारिक बातचीत हुई। हल्की धूप में दोनों नेताओं ने 18 वीं शताब्दी के शाही महल के बगीचे में चहलकदमी भी की। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, ‘लाभदायक साझेदारी का संबंध। प्राइवेट डिनर से पहले चांसलर मर्केल ने श्लॉस मेसेबर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी की।’ इस दौरान पारस्परिक हित के मसलों पर अनौपचारिक चर्चा हुई। औपचारिक वार्ता मंगलवार को होगी।
दोनों नेताओं के बीच चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) के अलावा दक्षिण चीन सागर के मसले पर भी बात हो सकती है। जर्मनी दुनिया के उन प्रमुख देशों में से एक है, जिसने कुछ दिनों पहले ओबीओआर उद्घाटन समारोह के समय चीन के इस प्रोजेक्ट पर संदेह जताया था। जबकि भारत ने इस सम्मेलन का बहिष्कार किया था।
जर्मनी के प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि इस परियोजना में और पारदर्शिता की जरूरत है। संदेह जताया गया कि इससे चीनी कंपनियों को ही फायदा होगा, जर्मन कंपनियों को नहीं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर के बीच इस पर चर्चा काफी मायने रखती है।
मोदी के साथ गए प्रतिनिधिमंडल में वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर शामिल हैं। वैश्विक शक्तियों से आर्थिक संबंध बढ़ाने और भारत में अधिक से अधिक निवेश लाने के मकसद से मोदी जर्मनी के बाद स्पेन, रूस और फ्रांस भी जाएंगे।
जर्मनी पहुंचने से पूर्व मोदी ने फेसबुक पोस्ट कर कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग और हमारी रणनीतिक साझेदारी को गहरा बनाएगी।’ मंगलवार को मोदी को सैन्य सम्मान दिया जाएगा।
दो वर्षों में होने वाली भारत-जर्मनी अंतरसरकारी परामर्श (आईजीसी) की चौथी बैठक भी होगी। पिछली बार यह बैठक नई दिल्ली में अक्टूबर 2015 को आयोजित की गई थी।
इंडो-जर्मन बिजनेस फोरम के उद्घाटन से पूर्व मोदी जर्मनी के व्यापार जगत के प्रमुख चेहरों से भी मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि जर्मनी भारत में सातवां बड़ा निवेशक है। 2000 से लेकर दिसंबर 2016 तक जर्मनी ने भारत में 9.54 बिलियन करोड़ डॉलर का निवेश किया है। भारत में जर्मनी की 1800 कंपनियां काम कर रही हैं।