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मिस नींबूपानी बनाने वाले को गोवा का सलाम

Mon, 09 May 2016 06:23 PM IST
पामेला डिमेलो/गोवा से

सार

  • जानेमाने चित्रकार और कार्टूनिस्ट हैं मारियो 
  • 'मिस नींबूपानी' पात्र काफी चर्चित रहा है
  •  22 देशों ने खास तौर पर आमंत्रित किया
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- फोटो : bbc
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विस्तार
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गोवा में जानेमाने चित्रकार और कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा की 90वीं जयंती को धूमधाम से मनाने की तैयारियां चल रही हैं। गोवा में जन्मे मारियो ने अपने चित्रों और कार्टूनों के जरिए गोवा की संस्कृति को दुनियाभर में खास पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया था।
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  दिसंबर, 2011 में अपने निधन से पहले मारियो ने गोवा और मुंबई की स्थानीय संस्कृति और चरित्रों को लेकर जो कार्टून और चित्र बनाए, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आम जीवन के रंगों से लोगों को परिचित कराने में खास योगदान दिया था।

उन्होंने इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया, टाइम्स ऑफ इंडिया और इकॉनॉमिक टाइम्स के लिए लंबे समय तक कार्टून बनाए थे। उनकी बॉस और सेक्रेटरी सीरिज़ के कार्टून और ग्लैमर वर्ल्ड की 'मिस नींबूपानी' जैसे पात्र काफी चर्चित रहे हैं। 
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    मारियो मिरांडा के बनाए हुए कई भित्तिचित्र यानी म्यूरल्स गोवा में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। उन्होंने कई शहरों के जीवन को अपनी पेंटिंग्स में उतारा जिनमें गोवा के अलावा पेरिस और हैम्बर्ग की पेंटिंग्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं।

मारियो अपने रेखाचित्र की बारीकियों के लिए दुनिया भर में मशहूर थे।उनके बनाए हुए हाट बाजार, स्कूल, दफ्तर, इमारतों और रेस्तराओं के रेखाचित्रों में हास्य-व्यंग्य का रंग दिखता है और जीवन की ढेर सारी गतिविधियों की जीवंत झलक दिखाई देती है।   मारियो के इस अहम योगदान की याद में गोवा संगीत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा उनके कलाकर्म पर आधारित एक प्रदर्शनी भी गोवा की राजधानी पंजिम के कला संग्राहलय में दिखाई जाएगी।

इस प्रदर्शनी में मारियो के 74 चित्रों की मूल प्रतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। जयंति के मौके पर मारियो गैलरी एंड म्यूज़ियम मिरांडा की 1949 के दौरान लिखी डायरी का प्रकाशन भी करने जा रहा है। इस डायरी में 22 वर्ष के युवा मारियो के मुंबई में बिताए छात्र जीवन का जिक्र मिलता है। मारियो ने अपने जीवन का एक अहम हिस्सा मुबंई और गोवा के बीच भागते-दौड़ते,बसते-बसाते गुजारा था। यह दौर उनके जीवन का सबसे ज्यादा संघर्ष का वक्त था। 
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मारियो की नजर में थे दो मुंबई

- फोटो : bbc
मारियो के चित्रों व कार्टूनों को संभालने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले क्युरेटर ग्रेरार्र द कूनिया के अनुसार,'मारियो की नजर से देखें तो हमें दो अलग किस्म के मुंबई देखने को मिलते हैं। एक मुंबई है जो जिंदगी का हर लुत्फ ले रहा है। शहरीकरण चमक-दमक से लबरेज. दूसरा मुंबई है जिसमें जीना मुहाल है। जो जिंदा रहने के लिए आवश्यक हर सुविधा के लिए तरस रहा है। ये कमाल मारियो ही कर सकते थे।'

मारियो 1970 और 80 के दशक में अपनी रचनात्मकता के सर्वोच्च शिखर पर थे। स्कूल की किताबों,कैलेंडरों से लेकर बहुत सी पत्रिकाओं में उनकी कला को जगह और सराहना,दोनों एक साथ मिल रही थी। इसके बावजूद मारियो की कला को 'कलाकारों' ने कला नहीं माना। वे मारियो को अपनी जमात का हिस्सा नहीं मानते थे। लेकिन मारियो रंगो की दुनिया में इतने डूबे हुए थे कि उन्होंने इस 'पराऐपन' पर ध्यान तक न दिया। इसे उस महान कलाकार के जीवन की त्रासदी माना जाएगा कि उन्हें चाहने वालों का एक बड़ा हिस्सा, उन्हें सिर्फ कार्टूनिस्ट के तौर पर जानता था।

यह तथ्य बहुत कम लोगों को पता है कि मारियो को 22 देशों ने अपने यहां अपनी बहुमुखी कला का प्रदर्शन करने के लिए खास तौर पर आमंत्रित किया था। मारियो ने सचेतन तौर पर राजनीतिक कार्टूनिंग नहीं की,लेकिन एक जिम्मेदार सामाजिक व्यंग्यकार के तौर पर उनको कोई नकार नहीं सकता है।
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