गोवा की राजधानी पणजी के नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित पैनल ने बड़ी जीत दर्ज की है। 30 में से 27 सीटें जीतकर भाजपा ने विपक्ष को लगभग पूरी तरह पीछे छोड़ दिया। मंत्री अतानासियो मोन्सेराते के नेतृत्व वाले पैनल की इस जीत को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी पणजी के नगर निगम चुनाव ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। इस चुनाव में भाजपा समर्थित पैनल ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए साफ संदेश दिया है कि पार्टी अभी भी राज्य की राजनीति में मजबूत स्थिति में है। 30 सीटों वाले इस चुनाव में भाजपा खेमे ने 27 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष को लगभग पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया। इस नतीजे को आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है।
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पणजी नगर निगम यानी सिटी कॉरपोरेशन ऑफ पणजी (सीसीपी) के चुनाव में मंत्री अतानासियो मोन्सेराते के नेतृत्व वाले भाजपा समर्थित पैनल ने बड़ी जीत दर्ज की। इस पैनल ने 30 में से 27 सीटों पर कब्जा कर लिया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर के समर्थन वाले पैनल को सिर्फ 3 सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है और इसे विकास की राजनीति की जीत बताया जा रहा है।
क्या यह जीत विधानसभा चुनाव का संकेत है?
राजनीतिक जानकार इस जीत को अगले साल होने वाले गोवा विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं। राजधानी के इस अहम निकाय में भाजपा समर्थित पैनल की बड़ी जीत से यह संकेत मिला है कि पार्टी का संगठन और जनाधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और भाजपा नेताओं ने इस जीत को जनता के भरोसे और विकास की नीति का परिणाम बताया है।
मोन्सेराते ने जीत का श्रेय किसे दिया?
मंत्री अतानासियो मोन्सेराते ने इस जीत को शहर में हुए विकास कार्यों का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने काम पर भरोसा जताया है और यही वजह है कि इतनी बड़ी जीत मिली है। उन्होंने कहा कि उनका पैनल आगे भी पणजी शहर के विकास, सफाई, यातायात और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम करता रहेगा।
उत्पल पर्रिकर ने हार पर क्या कहा?
चुनाव में हार के बावजूद उत्पल पर्रिकर ने इसे सिद्धांतों की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं था, बल्कि शहर के लोगों को एक मंच पर लाकर नागरिक मुद्दों पर चर्चा शुरू करना था। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए था और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।